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Hanuman Jayanti 2026: बजरंगबली से सीखें ये 7 जीवन बदलने वाले सबक

Thu, 02 Apr 2026 10:53 AM IST
Shivani Awasthi लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Hanuman Life Lessons: हनुमान जयंती 2026 के अवसर पर भगवान हनुमान से हम भक्ति, साहस, निस्वार्थ सेवा, अनुशासन, विनम्रता, धैर्य और समर्पण जैसे 7 महत्वपूर्ण जीवन सबक सीख सकते हैं, जो सफलता और शांति का मार्ग दिखाते हैं।
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हनुमान जी से सीखें ये सबक - फोटो : Amar ujala
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विस्तार
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हनुमान जयंती का पावन पर्व हमें केवल पूजा-अर्चना का अवसर ही नहीं देता, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा भी देता है। भगवान हनुमान जी को शक्ति, भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

उनके जीवन से हम कई महत्वपूर्ण सबक सीख सकते हैं, जो हमें कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की ताकत देते हैं। इस वर्ष हनुमान जयंती 2 अप्रैल को मनाई जा रही है। इस हनुमान जयंती पर भगवान हनुमान के गुणों या जीवन मंत्रों को अपनाएं। उनके जीवन से 7 सबक लें, जो आपके जीवन को सकारात्मक दिशा दे सकते हैं। ये सीख आपको हर मुश्किल में मजबूत बनाएंगी। 

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आइए जानते हैं हनुमान जयंती पर बजरंगबली के गुण और उनसे लें जीवन के 7 सबक।
 

भगवान हनुमान से सीखें 7 जीवन के सबक


1. भक्ति और समर्पण

हनुमान जी ने भगवान राम के प्रति अटूट भक्ति दिखाई। ये उनका समर्पण ही था कि श्रीराम की भक्ति में उन्होंने अपना वक्षस्थल चीरकर प्रभु राम और माता सीता का छवि दिखाई। माता सीता की तलाश में समुद्र तक लांघ गए और लक्ष्मण जी को बटाने के लिए संजीवनी बूटी लेने गए। 
  
सीख: अपने लक्ष्य और रिश्तों के प्रति ईमानदार रहें।


2. साहस और आत्मविश्वास

उन्होंने हर कठिनाई का सामना बिना डर के किया। लंका दहन करना उनका साहस था और समुद्र पार करना उनका आत्मविश्वास। बजरंगबली जी ने निडरता से सबका सामना किया।

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सीख: मुश्किल समय में डरने के बजाय हिम्मत दिखाएं।


3. निस्वार्थ सेवा

हनुमान जी ने बिना किसी स्वार्थ के सेवा की। भगवान राम के उद्देश्य की पूर्ति के लिए हनुमान जी ने निस्वार्थ सेवा की। वे लक्ष्मण जी को बचाने के लिए संजीवनी बूटी लाने चले गए। जड़ी बूटियों का ज्ञान न होने पर वह पूरा द्रोणागिरी पर्वत उठा लाए।

सीख: दूसरों की मदद करना ही सच्ची महानता है।


4. अनुशासन और संयम

उनका जीवन अनुशासन और नियंत्रण का उदाहरण है। अष्ट सिद्धियों के बावजूद उन्होंने खुद को अंहकारमुक्त रखा, ये उनका आत्मनियंत्रण है। वहीं अशोक वाटिका में उन्होंने संयम और ब्रह्मचर्य का पालन किया जो उनके चरित्र की सर्वोच्च मिसाल है। 

सीख: सफलता के लिए नियमितता जरूरी है।


5. विनम्रता

इतनी शक्ति होने के बावजूद वे हमेशा विनम्र रहे। एक बार उनकी मुलाकात वाल्मीकि जी से हुई। जब वाल्मीकि जी ने हनुमान जी की रचना देखी तो उन्हें लगा कि उनकी रचना बजरंगबली की रचना से कमतर है। इस पर हनुमान जी ने अपनी पत्थर पर लिखी रचना को नष्ट करने का निर्णय ले लिया। ये उनकी विनम्रता का एक उदाहरण है। 

सीख: सफलता के बाद भी अहंकार न करें।


6. धैर्य

उन्होंने हर परिस्थिति में धैर्य बनाए रखा। जब लंका मार्ग में सुरसा ने उनका रास्ता रोका तो हनुमान जी ने बल के बजाय धैर्य और बुद्धि से अपना शरीर छोटा किया और उनके मुख से निकल पाए। वहीं रावण की सभा में जब उन्हें अपशब्द कहे गए, तब भी उन्होंने अपना आपा नहीं खोया। 

सीख: जल्दबाजी के बजाय सही समय का इंतजार करें।


7. समर्पण और मेहनत

हनुमान जी ने हर काम को पूरी लगन से किया। ये उनकी मेहनत ही थी, जिसने प्रभु राम और सीता माता का मिलन संभव कराया। लंका विजय के बाद वह राम जी के साथ अयोध्या चले गए और मान्यता है कि आज तक अयोध्या की रक्षा कर रहे हैं, ऐसा समर्पण हनुमान जी के जीवन में कई मौकों पर देखने को मिला।

सीख: मेहनत और समर्पण से ही सफलता मिलती है।

 

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