"प्यार दोस्ती है, अगर वो मेरी सबसे अच्छी दोस्त नहीं बन सकती, तो मैं उससे कभी प्यार कर ही नहीं सकता, क्योंकि दोस्ती बिना तो प्यार होता ही नहीं। सिंपल, प्यार दोस्ती है।"
इस फिल्म में राहुल और अंजली बेस्ट फ्रेंड होते हैं लेकिन अंजली राहुल से प्यार करती है, इस बात का अहसास उसे तब होता है जब टीना उनकी जिंदगी में आती है और राहुल टीना से प्यार करने लगता है। वहीं राहुल भी अंजली के चले जाने के बाद महसूस करता है कि उनकी दोस्ती में कहीं न कहीं प्यार था। समय रहते राहुल और अंजली दोस्ती और प्यार के फर्क को समझ नहीं पाते। ये एक आम समस्या है जो आपके साथ भी हो सकती है।
कहते हैं कि सबसे अच्छी प्रेम कहानी वहीं शुरू होती है, जहां एक मजबूत दोस्ती होती है। लेकिन क्या हर गहरी दोस्ती प्यार में बदल जाती है? क्या आपने नोटिस किया कि आप अपने दोस्त को अब दोस्त से कुछ बढ़कर मानने लगे हैं? अगर नहीं तो इस फ्रेंडशिप डे के मौके पर दोस्ती और प्यार के बीच का असली फर्क पहचानें कि कहीं आपका दोस्त आपका क्रश तो नहीं बन चुका है।
दोस्ती और प्यार में फर्क
बिना देखे चैन न आना
दोस्ती में साथ रहना अच्छा लगता है, लेकिन प्यार में बिन देखे चैन नहीं आता। हर इंसान अपने दोस्त को खुश देखना चाहता है लेकिन अगर उसकी एक मुस्कान आपके दिन को बना देती है तो समझिए मामला दोस्ती से आगे बढ़ रहा है।
सिर्फ उनके बारे में सोचते रहना
दोस्त एक दूसरे के साथ कई सारे प्लान बनाते हैं और उस प्लानिंग को पूरा करने की कोशिश करते हैं लेकिन जब आपको उसी दोस्त से स्नेह हो जाता है तो आप उन पलों के बारे में सोचने लगते हैं, जिसमें आप अपने क्रश के साथ होंगे। प्लानिंग के बजाय आप उनके लिए क्या करेंगे, आप साथ कैसे होंगे, क्या-क्या जैसे विचार मन में आने लगें तो समझ जाएं आपके ख्वाबों-ख्यालों में दोस्त ने जगह बना ली है।
दोस्त के लिए जलन होना
अगर कोई और आपके दोस्त के करीब आ जाए और आपको बुरा लगने लगे तो यह इमोशन सिर्फ दोस्ती वाला नहीं। या जब दोस्त किसी और की तारीफ आपके सामने करें और आपको बुरा लगे तो समझ जाइए कि आप सिर्फ उनकी नजरों में खुद को देखना चाहते हैं।
जब आएं रूठने-मनाने वाले पल
दोस्त की फिक्र करना सामान्य है, लेकिन जब आप उसे पैंपर करने लगें, उसके रूठने से विचलित हो जाएं और उसे मनाने के लिए किसी भी हद तक जाएं तो समझ जाइए कि अब दोस्ती सिर्फ दोस्ती नहीं रह गई है, बल्कि प्यार बन रही है।
जब उसके बिना रहा न जाएं
खुद से सवाल कीजिए कि क्या आप उसके बिना रह सकते हैं। अग जवाब 'नहीं" हैं और दिल दोस्ती की गैरमौजूदगी में बेचैन रहता है, तो आपका दोस्त क्रश में बदल चुका है।