कई ऐसी बातें हैं, जो बहुएं अपनी सास से कहना तो चाहती हैं लेकिन सामाजिक दबाव या पारिवारिक माहौल के कारण वे खुलकर अपना भावनाएं व्यक्त नहीं कर पाती हैं। आइए जानते हैं वह बाते जो हर बहू अपने दिल में रखती हैं लेकिन सास से खुलकर नहीं कह पाती हैं।
आपका बेटा बड़ा हो गया है
शादी के बाद एक मां को यह समझने में वक्त लग सकता है कि अब उनका बेटा सिर्फ उनका नहीं, बल्कि उसकी पत्नी और बच्चों का भी है। वह चाहती हैं कि बेटा शादी के बाद भी उनकी सारी बातें मानें, किसी फैसले से पहले उनसे सलाह लें और अनुमति मांगे, जैसा वह शादी से पहले बचपन या युवावस्था में करता था। लेकिन शादी के बाद एक पुरुष पति और पिता बन जाता है। अब उसके फैसलों में पत्नी की भागीदारी भी होती है। ऐसे में जो सास अपने बेटे को शादी के बाद भी बच्चा ही समझती हैं, उनसे बहू ये कहना चाहती हैं, कि आपको यह समझने की जरूरत है कि आपके बेटे का अब अपना परिवार है। वह हर समय Mumma's Boy नहीं रह सकता।
मैं आपकी जगह नहीं लेना चाहती
घर पर बहू के आने के बाद कुछ परिवारों में सास को लगने लगता है कि बहू उन्हें बेटे से दूर कर देगी। घर की जिम्मेदारी तो वह बहू को सौंपना चाहती हैं लेकिन घर की चाबी या फैसले लेने का अधिकार नहीं देना चाहती। उन्हें लगता है कि बहू अब उनकी जगह ले लेगी। ऐसी स्थिति में सास बहू के रिश्ते में तनाव आने लगता है। हालांकि कोई बहू अपनी सास की जगह नहीं लेना चाहती। बहू चाहती है कि सास यह समझे कि हर रिश्ते की अपनी जगह होती है और वह उनकी अहमियत को कम नहीं करना चाहती हैं।
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मेरा काम भी जरूरी है
कामकाजी बहू पर दफ्तर के काम के साथ ही घर संभालने की जिम्मेदारी भी होती है। पारंपरिक रूढ़ीवादी घरों में सास ये चाहती हैं कि बहू घर की जिम्मेदारियां बखूबी निभाएं और दफ्तर का काम इस के बीच न आने पाए। कई बार ऐसी स्थिति में सास बहू के नौकरी करने के खिलाफ होती हैं, उनका मानना होता है कि पैसों की पूर्ति बहू की कमाई से नहीं होगी। लेकिन कामकाजी बहू अपनी सास से ये जरूर कहना चाहती हैं कि, वह केवल पैसों के लिए काम नहीं करतीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए काम करना पसंद करती हैं। उनकी नौकरी और काम भी महत्वपूर्ण हैं।
मुझे बेटी समझिए
हर लड़की अपने ससुराल में बहू नहीं बेटी बनकर रहना चाहती है। वह उम्मीद करती हैं कि उनकी सास का उनसे साथ वैसा ही रिश्ता हो, जैसा वह अपनी मां से रखती हैं। लेकिन कई बार लड़की को महसूस होता है कि उससे हमेशा बहू के रूप में ही व्यवहार किया जाता है और आदर्श बहू बनने का दबाव बनाया जाता है। वह अपनी सास से ये कहना चाहती हैं कि मुझे भी अपना समझिए, बहू नहीं बेटी की तरह देखिए। अपनी ही संतान की तरह प्यार और अपनापन दीजिए।
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मेरे माता पिता भी जरूरी हैं
बहुओं से ये उम्मीद की जाती है कि शादी के बाद वह अपने पति और ससुराल को प्राथमिकता दें। कई बार लड़की को अपने माता पिता से ज्यादा ससुराल पर ध्यान देने को कहा जाता है। बहू इतना भी कर लेती हैं लेकिन जब उनसे ये उम्मीद की जाती है कि मायके और माता पिता का मोह त्याग दें तो ये उनके लिए मुमकिन नहीं होता। बहू अपनी सास से कहना चाहती हैं कि वह अपने माता-पिता से उतना ही प्यार करती है, जितना आपका बेटा आपसे करता है। लेकिन शादी के बाद कई बार उसे बार-बार यह एहसास दिलाया जाता है कि अब उसका ससुराल ही सब कुछ है। वह चाहती है कि उसे अपने माता-पिता से मिलने और बात करने की पूरी आजादी मिले।
मेरी पसंद की जिंदगी जीने दें
शादी के बहू को अपने ससुराल की जीवनशैली, उनकी पसंद नापसंद और दिनचर्या के अनुरूप ढलने को कहा जाता है। ऐसे में उसकी जिंदगी में बहुत से बदलाव आते हैं। लेकिन बहू की अपनी कुछ पसंद होती है, वह चाहे कपड़ों को लेकर हो, करियर को लेकर हो या घर में काम करने के तरीके से जुड़ा हो। बहू चाहती हैं कि सास उसे उसके ढंग से रहने की स्वतंत्रता दें। बहू अपनी सास से ये बात कह नहीं पातीं लेकिन वह अपने तरीके और पसंद से जीने की स्वतंत्रता की मांग सास से करना चाहती हैं।