रंग, बजट, डिजाइन और कपड़े की क्वालिटी को लेकर भी दोनों पीढ़ियों की पसंद अलग हो सकती है। ऐसे में दुर्गा पूजा की शॉपिंग को बहस का मुद्दा बनाने के बजाय इसे परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताने का मौका बनाया जा सकता है। थोड़ी समझदारी, खुली बातचीत और बजट की पहले से प्लानिंग करके Gen-Z और Parents दोनों अपनी पसंद को जगह दे सकते हैं।
जनरेशन गैप से जुड़ी बहस का एक बड़ा कारण बजट हो सकता है। खरीदारी शुरू करने से पहले परिवार मिलकर तय कर लें कि किस सदस्य के कपड़ों पर कितना खर्च किया जाएगा। इससे महंगे और सस्ते आउटफिट को लेकर अचानक होने वाली बहस से बचा जा सकता है।
- ट्रेंडी और पारंपरिकता का बनाएं मिक्स
Gen-Z को ट्रेंडी फैशन पसंद हो सकता है, जबकि माता-पिता पारंपरिक कपड़ों को प्राथमिकता दे सकते हैं। इसका समाधान दोनों स्टाइल को मिलाना हो सकता है। उदाहरण के लिए ट्रेडिशनल साड़ी के साथ मॉडर्न एक्सेसरीज या क्लासिक कुर्ते के साथ स्टाइलिश जैकेट का विकल्प चुना जा सकता है।
- हर किसी को अपनी पसंद चुनने दें
पूरे परिवार के लिए एक जैसा स्टाइल तय करने के बजाय हर व्यक्ति को कम से कम एक आउटफिट अपनी पसंद से चुनने दें। इससे युवाओं को अपना फैशन एक्सप्रेस करने की आजादी मिलेगी और माता-पिता को भी अपनी पसंद के कपड़े चुनने का मौका मिलेगा।
- ऑनलाइन और ऑफलाइन खरीदारी का कॉम्बिनेशन
Gen-Z ऑनलाइन शॉपिंग और नए फैशन ट्रेंड्स से जल्दी अपडेट रहता है, जबकि माता-पिता कपड़े खरीदने से पहले उन्हें देखकर और छूकर क्वालिटी जांचना पसंद कर सकते हैं। ऐसे में कुछ चीजें ऑनलाइन और कुछ ऑफलाइन खरीदने का विकल्प अपनाया जा सकता है।
- सोशल मीडिया को अंतिम फैसला न बनने दें
इंस्टाग्राम या दूसरे सोशल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड कर रहा हर आउटफिट हर व्यक्ति पर समान रूप से अच्छा लगे, यह जरूरी नहीं है। ट्रेंड को आइडिया की तरह लें और कपड़े खरीदते समय फिट, आराम, मौसम और व्यक्तिगत पसंद को भी ध्यान में रखें।
- खरीदारी को प्रतियोगिता नहीं, फैमिली टाइम बनाएं
दुर्गा पूजा की शॉपिंग में किसकी पसंद सही है, इसे साबित करने के बजाय परिवार के साथ समय बिताने पर ध्यान दें। अगर किसी आउटफिट को लेकर सहमति न बने तो दूसरे विकल्प देखें। आखिरकार त्योहार का उद्देश्य साथ मिलकर खुशी मनाना है, न कि फैशन की पसंद को लेकर बहस करना।
जेन जी और अभिभावकों के लिए टिप्स
एक आसान तरीका यह हो सकता है कि हर व्यक्ति एक ट्रेडिशनल और एक मॉडर्न विकल्प चुने और फिर बजट के हिसाब से अंतिम आउटफिट तय किया जाए। इससे दोनों पीढ़ियों की पसंद को जगह मिल सकती है और दुर्गा पूजा की शॉपिंग ज्यादा मजेदार बन सकती है।