आजकल की भागती-दौड़ती जिंदगी में तनाव और डिप्रेशन जैसी समस्या होना आम बात है लेकिन क्या आप जानते हैं डिप्रेशन का एक बहुत बड़ा कारण है शादी। जी हां, आजकल के नवविवाहित जोड़े शादी के बाद डिप्रेस हो जाते हैं।
शोधों के मुताबिक, शादी के बाद कई लोग डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं जिन्हें मेडीकल टर्म में 'पोस्ट-नप्शल डिप्रेशन' कहा जाता है। इतना ही नहीं रिसर्च में ये भी साबित हुआ है कि लाइफ में आने वाले अचानक बड़े बदलाव, नई जिम्मेदारियां और नए माहौल से पुरूषों के मुकाबले महिलाएं अकसर डिप्रेशन का शिकार हो जाती है।
आइए जानें उन कारणों से जिनसे डिप्रेशन बढ़ने की आशंका रहती है और डिप्रेशन से बचने के उपायों के बारे में।
एडजेस्ट न करने की आदत
कई लोगों में एडजेस्ट न करने की आदत होती है। ऐसा खासतौर पर उन लोगों के साथ होता है जो इकलौते होते हैं। ऐसे में शादी के बाद जब एडजेस्ट करना पड़ता है तो युवा अकसर तनाव में आकर डिप्रेस हो जाते हैं।
नया माहौल
शादी के बाद लड़की के लिए एकदम नए माहौल में जाने से भी लड़की डिप्रेस हो जाती है। नए माहौल को समझने और घरवालों की उम्मीदों पर खरा उतरने के चक्कर में लड़की डिप्रेशन का शिकार होने लगती है।
जिम्मेदारियों का बढ़ना
यदि आप वर्किंग हैं तो जाहिर सी बात है शादी के बाद आपकी जिम्मेदारियां और भी अधिक बढ़ जाती है और ये इस स्थिति से आप चाहकर भी नहीं जूझ पाते ऐसे में डिप्रेशन होना आम बात है।
अनचाहा दबाव होना
जब महिलाएं शादी के बाद अनचाहा दबाव महसूस करती हैं और अपनी बातें ठीक से खुलकर नहीं कह पाती तो अकसर के तनाव में आ जाती हैं।
रिजर्व नेचर
कई लोग बेहद रिजर्व होते हैं और लोगों से जल्दी घुल-मिल नहीं पाते। ऐसे में जब किसी लड़की की शादी होती है तो नए लोगों से मिलने-जुलने में उसे दिक्कत आने लगती है। इसी कारण कई बार घबराहट भी हो जाती है। ऐसे में महिलाएं अपने आपको अकेला महसूस करते हुए तनाव में रहने लगती हैं।
और भी कई कारण जैसे अलग कल्चर-संस्कृति इत्यादि को जानने-समझने के दौरान भी लोग तनाव में आ जाते हैं। यानी थोड़ा सा भी बोझ या जिम्मदारी आने से नवविवाहित जोड़ों को तनाव होने लगता है। लेकिन ऐसा नहीं कि इसके उपाय नहीं है, डिप्रेशन से बचने के लिए आप कुछ उपाय भी अपना सकते हैं।
उपाय जिनसे बच सकते हैं डिप्रेशन से
हनीमून पर जाएं- शादी के तुरंत बाद आपको 5 से 10 दिन के लिए हनीमून पर जाना चाहिए। इससे आपको ना सिर्फ अपने पार्टनर को समझने में मदद मिलेगी बल्कि आप अपने पार्टनर के साथ उसके परिवार वालों को भी जान जाएंगे।
शादी से पहले मिले घरवालों से
शादी से पहले संभव हो तो दोनों पार्टनर्स को एक-दूसरे के घरवालों से मिलना चाहिए। सिर्फ एक बार मिलने से ही काम नहीं बनेगा बल्कि आपको कई बार घर पर मिलने आना-जाना चाहिए। इससे आप घर वालों के व्यवहार के बारे में जान पाएंगे।
कल्चर को जानें
आपको चाहिए कि आप अपने पार्टनर के घर के कल्चर को समझें। उनकी संस्कृति, उनकी मान्यताओं को समझें। इससे आपको एडजेस्ट करने में आसानी होगी।
शादी को बोझ ना समझें
आपको चाहिए कि आप शादी को बोझ ना समझें बल्कि उसकी लिए खुशी-खुशी राजी हो, इससे आपकी आधे से ज्यादा टेंशन यूं ही खत्म हो जाएगी।
अपने मन की बात कहें
शादी के बाद परिवार वालों के सामने कोई दबाव महसूस ना करें बल्कि अपने मन की बात कहें। यदि आप बातें मन ही मन में रखेंगे तो आप तनाव में आ सकते हैं।
सोच में लाए खुलापन
यदि आपको शादी के बाद के कई किस्से सुन रखे होंगे तो जरूरी नहीं कि आपके साथ भी वही सब हो जो कि अच्छा-बुरा आपने सुना है बल्कि आपको परिस्थितियों के अनुसार पेश आना चाहिए। आपको नए घर जाकर घरवालों को अपना शुभचिंतक समझना चाहिए ना कि दुश्मन।
खुलकर बोलें
यदि आपको घर में कोई भी तकलीफ है या फिर आप किसी चीज से असहज हैं तो अपने पार्टनर से इस बारे में जरूर डिस्कस करें। यदि आप अपनी परेशानियों का हल खुद नहीं ढूंढेंगे तो आप डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं।
अकेले ना रहें
आप कभी भी अपने आपको अकेला ना समझें और अकेले ना सोचे। यदि आपको बुरे खयालात आते हैं तो आप मेडीटेशन करें और अपने आपको अधिक से अधिक व्यस्त रखें। याद रखें अधिक से अधिक कम्यूनिकेशन आपको डिप्रेशन से बचा सकता है।