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पेरेंटिंग टिप्स: आपसे हर बात शेयर नहीं करता बच्चा? माता-पिता आज ही सुधारें ये 7 बड़ी गलतियां

Fri, 30 Oct 2026 06:28 AM IST
सोनिया चौहान लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Parenting Mistakes: बच्चों के मन में क्या चल रहा है, यह समझना हर माता-पिता के लिए जरूरी है। लेकिन कई बार अनजाने में माता-पिता की कुछ आदतें बच्चों को अपनी भावनाएं साझा करने से रोक सकती हैं।
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पैरेंटिंग टिप्स हिंदी - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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Parenting Mistakes In Hindi: हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा उनसे अपनी हर खुशी, परेशानी और डर खुलकर शेयर करे। लेकिन जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, कई बार वे माता-पिता से बातें छिपाने लगते हैं या अपनी भावनाएं व्यक्त करने से बचते हैं। इसका मतलब हमेशा यह नहीं होता कि बच्चा जिद्दी या बदल गया है। कई बार घर का माहौल और माता-पिता का प्रतिक्रिया देने का तरीका भी बच्चे के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। अगर बच्चा आपसे अपनी बात कहने के बजाय दोस्तों, मोबाइल या किसी और व्यक्ति के साथ ज्यादा सहज महसूस करने लगा है, तो अभिभावकों को अपनी कुछ आदतों पर जरूर ध्यान देना चाहिए।

 

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छोटी-छोटी गलतियां बच्चे के मन में यह भावना पैदा कर सकती हैं कि उसकी बात सुनी या समझी नहीं जाएगी। ऐसे में डांटने या दबाव बनाने के बजाय भरोसे और संवाद का माहौल बनाना ज्यादा जरूरी है।आइए जानते हैं वे 7 आम गलतियां, जिन्हें माता-पिता को बच्चे के साथ बेहतर रिश्ता बनाने के लिए छोड़ देना चाहिए।
 


1. हर बात पर डांटना

अगर बच्चा कोई बात बताता है और उसे तुरंत डांट मिलती है, तो वह अगली बार अपनी समस्या शेयर करने से बच सकता है। पहले उसकी पूरी बात सुनना जरूरी है।

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2. उसकी बात को छोटा समझना

बड़ों को बच्चे की परेशानी छोटी लग सकती है, लेकिन बच्चे के लिए वही समस्या बहुत बड़ी हो सकती है। उसकी भावनाओं को नजरअंदाज करने के बजाय उन्हें समझने की कोशिश करें।


3. दूसरे बच्चों से तुलना करना

“देखो, दूसरा बच्चा कितना अच्छा है” जैसी बातें बच्चे के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती हैं। तुलना की जगह बच्चे की अपनी प्रगति पर ध्यान दें।


4. हर गलती पर सजा की धमकी देना

अगर बच्चे को लगता है कि सच बताने पर उसे सजा मिलेगी, तो वह सच छिपाना शुरू कर सकता है। गलत व्यवहार पर समझाना और परिणामों के बारे में शांत तरीके से बात करना ज्यादा प्रभावी हो सकता है।
 

5. उसकी बात बीच में काटना

बच्चा अपनी बात पूरी करना चाहता है। बार-बार बीच में रोकने या तुरंत सलाह देने के बजाय उसे पूरा बोलने दें। इससे उसे महसूस होगा कि उसकी बात की अहमियत है।


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6. उसकी निजी बात दूसरों को बताना

बच्चे ने भरोसे में कोई बात कही और माता-पिता ने उसे रिश्तेदारों या दोस्तों के सामने बता दिया, तो उसका भरोसा टूट सकता है। उसकी निजी बातों का सम्मान करना जरूरी है।

7. सिर्फ पढ़ाई और परिणामों पर ध्यान देना

अगर बातचीत हमेशा पढ़ाई, नंबर, अनुशासन या भविष्य को लेकर होती, तो धीरे-धीरे बच्चा अपनी परेशानियां और भावनाएं खुलकर शेयर कर सकता है है, तो बच्चा भावनात्मक बातें शेयर करने से बच सकता है। रोज कुछ समय बिना किसी दबाव के उसके साथ बिताएं।


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