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'हिंसक रिश्ता' यूं निकल सकते हैं बाहर!

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हिंसा किसी भी रूप में हो सकती है। शारीरक, मानसिक अथवा सेक्स सम्बंधित। किसी भी प्रकार में मूल रूप से परस्पर सम्मान, विश्वास और तालमेल कि कमी तो होती है। कई बार लोग इस तरह के हिंसात्मक सम्बन्धों का बोझ लम्बे समय तक धोते रहते हैं, ये मानकर कि वो इस में उलझ चुके हैं और बहार निकलने का कोई रास्ता नहीं है।
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ऐसा ही एक मामला यहाँ है:

नेहा और समीर पांच साल से साथ हैं। रिश्ते कि शुरुआत के साथ ही नेहा ने अपना साडी प्राथमिकताएं सिर्फ समीर पर ही केंद्रित कर दी। समीर नेहा पर ज़रूरत से ज़यादा अधिकार समझता है। नेहा के किसी और व्यक्ति से बात करने भर से ही उसे नाराज़गी हो जाती है। नेहा के जीवन पर नियंत्रण रखना समीर अपना अधिकार समझता है।

इस तरह कि स्थिति से बाहर निकलना भी नेहा असम्भव समझती है क्योंकि ऐसा करने कि बात से समीर खुद को या नेहा को नुक्सान पहुँचाने कि धमकी देता है। तो शायद थक हार कर नेहा ने इसे अपनी किस्मत समझ कर स्वीकार कर लिया।
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क्या आप भी हिंसापूर्ण सम्बन्ध में है?

आप हिंसापूर्ण सम्बन्ध में है अगर...
यदि आपका साथी आपको शारीरक रूप से प्रताड़ित करता है- जैसे मारना, बाल खींचना, या गुस्से में आप पर कुछ फेंक देना।
यदि आपका साथी आपको सेक्स करने के लिए मजबूर करता है। (ये बलात्कार के सामान है, चाहे आप सम्बन्ध में ही क्यूँ न हों)
यदि आपका साथी आपको मरने या नुक्सान पहुँचाने कि धमकी देता है।

आपको इस प्रकार कि वेदना से भरे सम्बन्ध से बाहर निकलने का हर सम्भव प्रयास करना चाहिए।

आपके हिंसापूर्ण सम्बन्ध में होने के कुछ संकेत...

आपको अपने साथी के गुस्सा होने का डर रहता है।
आपका साथी आपको सेक्स करने के लिए या सेक्स के दौरान ऐसा कुछ करने के लिए मजूर करता है जो आपको पसंद नहीं है।
आपका साथी आपकी ज़िन्दगी पर अपना अधिकार समझता है।
आपका साथी आपके दोस्त और परिवार के साथ समय बिताना पसंद नहीं करता।
आपका साथी हर वक़्त आपकी गतिविधियों पर नज़र बनाये रखना चाहता है।
आपका साथी आपके ईमेल या फोन के पासवर्ड पूछता है।
आपका साथी आपको सार्वजानिक स्थान पर बेइज़ज़त करने कि कोशिश करता है।
आपका साथी आपको रिश्ते कि हर परेशानी या लड़ाई के लिए ज़िम्मेदार ठहराता है।
आपका साथी स्थिति के अनुकूल सच को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत करने का प्रयास करता है।
आपको रिश्ते से बाहर निकल पाना लगभग असम्भव लगता है।
आप अपने आप को ये कहता पाते हैं कि "वो मुझे बहुत तकलीफ पहुंचाता है, लेकिन मैं उस से प्यार करता/करती हूँ" या फिर "वो मुझे वेदना देता है लेकिन मैं उसके बिना ज़िंदा नहीं रह सकता/सकती।"

ये सभी हिंसापूर्ण सम्बन्धों के पारम्परिक संकेत हैं। यदि आपको ऐसा कोई संकेत दिखे तो आपको इसे नज़रअंदाज़ किये बगैर अपने साथी के इसके बारे में बात करनी चाहिए। लेकिन यदि आपको इनमे से अधिकांश संकेत अपने जीवन में दिख रहे हों तो शायद फैसला लेने का समय आ चूका है।

ऐसे रिश्तों से बाहर कैसे निकला जाये

पहले आपको ये आभास होना ज़रूरी है कि आपको इस प्रकार कि वेदना नहीं झेलनी चाहिए। सम्मान एक प्रेम से भरे सम्बन्ध का ज़रूरी अंश है। तो अगर आपको ऐसे संकेत दिखायी दे रहे हैं, तो आपको बेझिझक सहायता लेनी चाहिए।

ये सम्भव है कि इन् सब बातों के चलते इस दौरान आपके और आपके दोस्तों या परिवार के बीच दूरियां आ चुकी हों लेकिन समझदारी इसी में है कि आप उनसे संपर्क करें और अपनी समस्या उनसे बांटें। अपनी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए उनसे ईमेल या फोन बार अपनी स्थिति बता दें। ध्यान रहे कि जिस के साथ आप ये बातें करें उस पर आपको पर्याप्त भरोसा हो। उन्हें अपनी मनोस्थिति से अवगत कराएं और उन्हें बता दें कि भरसक प्रयास कर चुकने के बाद अब आप इस कटूता पूर्ण सम्बन्ध से बाहर आने का मन बना चुके हैं।

यदि आपको किसी मित्र या परिवार से मदद न मिले तो आप किसी सलाहकार या हेल्पलाइन कि मदद भी ले सकते हैं, जो फोन पर ही आपको इस मुश्किल में सहायता दे सकते हैं। ऐसे कुछ हेल्पलाइन नंबर कि सूची ये है:

आप मदद के लिए पुलिस को भी फोन कर सकते हैं। आपके यहाँ कि पुलिस कितनी मददगार होगी इस बात कि जानकारी हमसे बेहतर आपको होगी।

यदि अपने इस से बाहर निकलने का निर्णय ले लिया है तो कुछ बैटन का ध्यान रखें। ऐसा करने का कोई एक फार्मूला नहीं है। आप उनसे कभी न मिल्न एक फैसला कर सकते हैं, मोबाइल सन्देश के ज़रिये उन्हें बता सकते हैं, उनसे और उनके सभी परिवार वालों से फोन या किसी भी प्रकार का संपर्क बंद कर सकते हैं- ये सब सम्भव है यदि आप दोनों साथ में न रहते हों।

भाग निकलना

यदि आप शादी शुदा हैं और हिंसापूर्ण सम्बन्ध में अपने साथी के साथ एक ही घर में रहता हैं, तो आपको वहाँ से निकलने कि सही योजना बनानी पड़ेगी। निम्निखित बिंदुओं कि मदद से शायद आपकी मुस्किल थोड़ी आसान हो पाये:

योजना बनाये
गहरायी से सोच के, कि ऐसा करने के लिए सही अवसर या दिन कौनसा होगा। शायद जब आपका साथी शहर से बाहर हो, किसी काम के सिलसिले में या फिर अपने दोस्तों के साथ। यदि आपके बच्चे भी हैं तो आप उन्हें अपनी परिस्थिति समझा कर ये कदम उठाएं।

किसी भरोसेमंद व्यक्ति को फोन करके सहायता मांग लें। अगर सब कुछ योजना के अनुकूल न हो पाये तो ऐसे में सहायता तैयार रहेगी। उन्हें अपनी मंशा और योजना समझा दें।

रहने के लिए कोई ऐसी सुरक्षित जगह चुने जहाँ आपकी साथी आपका पीछा न कर सके।

कुछ पैसों का बंदोबस्त करके रखें। और इन् पैसों के साथ आप कितने दिन काम चला पाएंगे, ये भी सोच के रखें। यदि पैसों का बंदोबस्त नहीं है तो किसी से थोड़े समय के लिए उधार लेने में कोई बुराई नहीं है।

अपने आप को मानसिक रूप से शांत होने देने के लिए कुछ समय दें। अपने आप के साथ दुर्व्यवहार होने देने कि आदत तोडना आवशयक था। अपनी ज़िन्दगी फिर से सामान्य करने कि क्रिया में लग जाएं। इसके लिए अगर परामर्श कि ज़रूरत पड़े तो पीछे न हटें।

यदि आप शादीशुदा हैं तो तलाक कि प्रकिर्या शुरू कर दें। इसके लिए कानूनी सलाह लेना सही होगा।

बहुत से मामलों में इस प्रकार कि  प्रतारणा के शिकार होने के बावजूद लोग चुपचाप सहते रहते हैं। उनके ऐसा करने के अपने कारण होते हैं। सबसे आम कारण होता है कि वो वेदना देते वाले अपने साथी से बहुत प्यार करते हैं और उन्हें उम्मीद होती है कि एक दिन वो ऐसा करना बंद कर देंगे।

या फिर शायद मनोबल और आत्मसम्मान कि कमी, समाज का दबाव और परिवार का अपमान कुछ और वजह हो सकती हैं। कई बार आसपास के लोगों और समाज के तानो के डर से कई लोग सारी उम्र ऐसी तकलीफ के साथ गुज़ार देते हैं। और बहुत से मामलों में बच्चों के भविष्य को सोच कर ये अपमानजनक ज़िन्दगी को सहन कर लिया जाता है।
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आप हिंसा करना कैसे बंद कर सकते हैं?

क्या आप अपने साथी को प्रताड़ित कर रहे हैं? क्या अपने साथी पर आवश्यकता से अधिक अधिकार जाता रहे हैं? क्या आप ऐसा करना नहीं चाहते लेकिन समझ नहीं पा रहे कि कैसे खुद को रोकें? ये आसान तो नहीं, लेकिन अपनी गलती समझ में आते ही आपने समस्या का आधा समाधान तो खुद ही ढून्ढ लिया है। आपकी सहायता के लिए कुछ बिंदु:

अपने साथी के अलावा किसी ऐसे विश्वसनीय व्यक्ति को चुनिए जिससे आप इस बारे में बात कर पाएंगे। ये एक साहसिक कदम है। लेकिन ऐसा करने के साथ अपने सुनिश्चितकर लिया है कि अब आपके अलावा कोई ऐसा व्यक्ति है जो आपकी गलतियों का आभास आपको निष्पक्षता से करा सकता है।

अपने दुर्व्यवहार कि वजह जानने कि कोशिश करिये। कई बार आपके जीवन में होने वाली हर प्रितकूल बात का गुस्सा आप अपने साथी पर उतरने लगते हैं। कहीं आपके साथ भी ऐसा तो नहीं हो रहा? क्या आपका उनके प्रति अविश्वास अतीत में हुई किसी घटना के फलस्वरूप तो नहीं है? क्या आपकी सुरक्षा कि वजह ये तो नहीं कि आपके साथी ने कभी आपका भरोसा तोडा था? आपका पिछला रिश्ता, या असफल शादी, या बचपन का बुरा अनुभव?

अपने साथी से खुलकर बात करें। जब आप अपने बुरे व्यव्हार कि वजह जान लें तो अपने साथी को इस बारे में बता दें. उन्हें बताएं कि आप अपना व्यव्हार बदलने के लिए क्या करने कि सोच रहे हैं? उन्हें अपनी तरफ ले लें। उनका विश्वास जीतें। उनसे पूछें कि उन्हें आपकी कौनसी बात गलत लगती है।

सकारात्मक व्यव्हार कि और अग्रसर रहे। जब आप सकारत्मक और नकारत्मक के बीच का अंतर समझ जायेंगे तो आपके लिए सकारत्मक रहना आसान होगा। अपने गुस्से पर काबू रखने के लिए प्रतिबद्ध रहे। अपने आप को याद दिलाएं  कि गुस्सा करने का निर्णय आपका होता है तो अब उसे काबू करना भी आपका ही काम है।

अपने साथी से बहुत मधुरता कि उम्मीद मत रखें। उनका गुस्सा आपके व्यव्हार कि वजह से जायज़ है। अचानक आपके उम्मीद देने से ज़रूरी नहीं कि वो हर पुराणी बात एक पल में भूल जाएं। उनकी बुरी प्रतिक्रिया के लिए खुद को तैयार रखिये।

धैर्य से काम लीजिये। अचानक रातोंरात आपका बदल जाना शायद सम्भव न हो। इस प्रकार के व्यवहार को पूरी तरह से बदलने में थोडा समय लग सकता है।
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