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Pongal 2026: पोंगल क्यों मनाया जाता है? जानिए इस पर्व की परंपरा, महत्व और उत्सव का पूरा अर्थ

Tue, 06 Jan 2026 01:12 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Pongal 2026 Kab Hai: पोंगल 2026 सिर्फ तमिलनाडु का पर्व नहीं, यह भारत की कृषि आत्मा का उत्सव है। यह त्योहार सिखाता है, जब अन्न, सूर्य और श्रम का सम्मान होता है, तभी समाज सच में समृद्ध बनता है।
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पोंगल क्यों मनाया जाता है - फोटो : Amar ujala
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विस्तार
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Pongal 2026 Kab Hai: भारतीय त्योहार, सिर्फ भगवान की कथाओं तक सीमित नहीं हैं। ये धरती, श्रम और प्रकृति के साथ इंसान के रिश्ते की कहानी भी कहते हैं। तमिलनाडु का प्रमुख पर्व पोंगल इसी परंपरा का जीवंत उदाहरण है। पोंगल पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का उत्सव है, जो कि आमतौर पर हर साल 14 जनवरी से 17 जनवरी तक मनाया जाता है। इस चार दिवसीय पर्व की धूम दक्षिण भारत में, और सबसे अधिक तमिलनाडु में देखने को मिलती है।

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पोंगल आते ही दक्षिण भारत के घर-आंगन में मिट्टी की खुशबू, नई फसल की चमक और उबलते दूध की मधुर सुगंध आने लगती है। यह त्योहार अन्नदाता किसान के सम्मान, सूर्य की आराधना और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का पर्व है। आइए जानते हैं कि पोंगल पर्व क्यों मनाते हैं? चार दिन के पोंगल त्योहार का क्या महत्व और इसे मनाने का तरीका क्या है।

पोंगल क्यों मनाया जाता है?

पोंगल शब्द तमिल भाषा के पोंगु से निकला है, जिसका अर्थ है उबाल आना या छलकन। यह पर्व नई फसल के आगमन की खुशी में मनाया जाता है। जब धान की फसल कटकर घर आती है, तब सूर्य देव, धरती माता और पशुधन को धन्यवाद देने के लिए पोंगल मनाया जाता है। पोंगल मूल रूप से सूर्य उपासना का पर्व है। इसे कृषि संस्कृति के उत्सव के रूप में मनाते हैं और यह किसान की मेहनत को नमन करने का दिन है।
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पोंगल 2026 कब मनाया जाएगा?

पोंगल हर साल मकर संक्रांति के आसपास, तमिल पंचांग के अनुसार मनाया जाता है। आमतौर पर यह 14 से 17 जनवरी तक चार दिनों का उत्सव होता है।


पोंगल के चार दिन और उनकी परंपरा

भोगी पोंगल

पहला दिन पुराने को विदा करने का प्रतीक है। लोग पुराने कपड़े, बेकार सामान जलाकर नई शुरुआत का संकल्प लेते हैं। घरों की सफाई और रंगोली बनाई जाती है।

सूर्य पोंगल

यह सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन सूर्य देव को धन्यवाद देने के लिए खुले आंगन में मिट्टी के बर्तन में दूध और चावल पकाया जाता है। जब दूध उबलकर बाहर आता है, तो कहा जाता है, पोंगलो पोंगल

मट्टू पोंगल

यह दिन पशुधन को समर्पित होता है। गाय-बैलों को नहलाया जाता है, सजाया जाता है और पूजा की जाती है। किसान संस्कृति में पशुओं के योगदान को यह दिन सम्मान देता है।

 कन्नुम पोंगल

यह दिन परिवार और सामाजिक मेल-मिलाप का होता है। लोग रिश्तेदारों से मिलते हैं, पिकनिक पर जाते हैं और लोक गीतों के साथ उत्सव मनाते हैं।


पोंगल कैसे मनाया जाता है?

  • घरों के बाहर कोलम (रंगोली) बनाई जाती है।
  • नई फसल से बने पकवान खाए जाते हैं।
  • पारंपरिक कपड़े पहने जाते हैं।
  • लोक नृत्य, गीत और मेलों का आयोजन होता है
  • पोंगल का मुख्य व्यंजन भी पोंगल ही है, जो चावल, दूध और गुड़ से बनाया जाता है।


पोंगल हमें याद दिलाता है कि अन्न सिर्फ बाजार से नहीं आता, खेत से आता है। प्रकृति के साथ संतुलन ही असली समृद्धि है और परंपराएं हमें हमारी जड़ों से जोड़े रखती हैं। 

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