ब्राजील की एक यूनिवर्सिटी में किए गए शोध में वृद्ध लोगों में शारीरिक गतिविधि में शामिल होने के महत्व पर जोर दिया गया है, क्योंकि पुरानी बीमारियों के कारण कमजोर मांसपेशियों के और अधिक कमजोर होने का जोखिम अधिक होता है।
ब्राजील में साओ पाउलो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हाल ही में कोरोना संकट के दौरान बुजुर्गों के लिए शारीरिक निष्क्रियता के खतरों से जुड़े कुछ पहलुओं पर प्रकाश डाला है।
‘जर्नल ऑफ द अमेरिकन जेरिएट्रिक्स सोसायटी’ में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि उम्र के एक पड़ाव पर पहुंच जाने के बाद हमारे शरीर की मांसपेशियों को सिकुड़ने और खराब होने में केवल 5 से 10 दिनों की शारीरिक निष्क्रियता लगती है। यह सार्कोपेनिया (मांसपेशियों को) की प्रगति को गति दे सकता है।
अध्ययन से यह भी पता चलता है कि जो बुजुर्ग प्रतिदिन 1,500 से कम कदम चलते हैं, उनके पैरों में मांसपेशी ऊतक का 4 प्रतिशत भाग कम हो सकता है।