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क्या आप जानते हैं नए साल पर हम क्यों लेते हैं संकल्प, कब से चल रही परंपरा?

Mon, 01 Jan 2018 10:35 AM IST
नंद राम
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नए वर्ष पर संकल्प लेने की शुरुआत आज से लगभग चार हजार वर्ष पूर्व प्राचीन बेबीलोन में हुई थी। बेबीलोन प्राचीन मेसोपोटामिया का हिस्सा था। बेबीलोनवासियों ने ही नव वर्ष पर सबसे पहले जश्न मनाया और संकल्प लिया था। वे नव वर्ष जनवरी में नहीं मध्य मार्च में मनाते थे, जब वहां फसल की रोपाई होती थी। नव वर्ष का यह उत्सव 12 दिनों तक चलता था, जिसे ‘अकितू’ कहा जाता था। 

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अकितू नाम के इस धार्मिक उत्सव में या तो नए राजा का चुनाव किया जाता था या बेबीलोनवासी अपने राजा के प्रति अपनी निष्ठा जताते थे। वे ईश्वर से वादा करते थे कि यदि उन्होंने कोई कर्ज या किसी से कोई सामान लिया है, तो वे उसे अवश्य लौटा देंगे। नए वर्ष पर संकल्प लेने की शुरुआत इन्हीं वादों से मानी जा सकती है। 

भावना बर्मी सीनियर क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट कहती हैं, लोग मुख्य रूप से दो कारणों से संकल्प लेते हैं। पहला, बाहरी दबाव या दिखावे के कारण। इसमें जब हम अपने आसपास के लोगों को संकल्प लेता देखते हैं, तो हम भी उनका देखा-देखी संकल्प ले बैठते हैं। 

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दूसरा, किसी भी परिस्थिति में बिना सोचे-समझे संकल्प लेना। इसमें लोग जल्दबाजी में यह तो ठान लेते हैं कि मैं इस बार अपने अंदर सुधार या बदलाव लाकर रहूंगा, लेकिन अधिकतर लोग इसमें असफल हो जाते हैं। इन संकल्पों का पूरा होने या न होने के पीछे भी यही दो कारण प्रमुख भूमिका निभाते हैं। यदि हम किसी को देखकर संकल्प लेते हैं, तब निश्चित रूप से वह पूरे नहीं हो पाते हैं। हालांकि, जिन संकल्पों को हम स्वयं लेते हैं, उनके पूरे होने की ज्यादा संभावना रहती है। 

आंकड़ों पर गौर करें, तो सिर्फ 10 फीसदी लोग ही इन्हें पूरा कर पाते हैं। 90 फीसदी लोग अपने संकल्पों को पूरा करने में असफल रहते हैं। अमेरिका में हुए एक शोध के अनुसार, 80 प्रतिशत लोगों के संकल्प फरवरी आते-आते टूट जाते हैं। बड़े संकल्प लेने की बजाय छोटे संकल्प लें। किसी के कहने पर संकल्प लेने से बचें। 
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