दूसरा, किसी भी परिस्थिति में बिना सोचे-समझे संकल्प लेना। इसमें लोग जल्दबाजी में यह तो ठान लेते हैं कि मैं इस बार अपने अंदर सुधार या बदलाव लाकर रहूंगा, लेकिन अधिकतर लोग इसमें असफल हो जाते हैं। इन संकल्पों का पूरा होने या न होने के पीछे भी यही दो कारण प्रमुख भूमिका निभाते हैं। यदि हम किसी को देखकर संकल्प लेते हैं, तब निश्चित रूप से वह पूरे नहीं हो पाते हैं। हालांकि, जिन संकल्पों को हम स्वयं लेते हैं, उनके पूरे होने की ज्यादा संभावना रहती है।
आंकड़ों पर गौर करें, तो सिर्फ 10 फीसदी लोग ही इन्हें पूरा कर पाते हैं। 90 फीसदी लोग अपने संकल्पों को पूरा करने में असफल रहते हैं। अमेरिका में हुए एक शोध के अनुसार, 80 प्रतिशत लोगों के संकल्प फरवरी आते-आते टूट जाते हैं। बड़े संकल्प लेने की बजाय छोटे संकल्प लें। किसी के कहने पर संकल्प लेने से बचें।