Maulana abul kalam azad jayanti 2025 : भारत के पहले शिक्षा मंत्री और महान स्वतंत्रता सेनानी मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जयंती हर साल 11 नवंबर को मनाई जाती है। यह दिन शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को याद करने और समाज में ज्ञान के महत्व को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। 2025 में भी यह दिन पूरे देश में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।
मौलाना आज़ाद न केवल एक दूरदर्शी शिक्षाविद थे, बल्कि एक सशक्त लेखक, पत्रकार और विचारक भी थे। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी शिक्षा को सबके लिए सुलभ बनाने में लगा दी। मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का जीवन शिक्षा, समानता और एकता का पाठ है। उन्होंने दिखाया कि शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण की सबसे मजबूत नींव है। आइए जानें उनके जीवन से जुड़ी पांच दिलचस्प बातें।
मक्का में जन्म, भारत में कर्मभूमि
11 नवंबर 1888 को मक्का में जन्मे मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का असली नाम अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन अहमद था। बचपन में ही परिवार के साथ वे भारत लौट आए और कोलकाता में शिक्षा प्राप्त की।
बाल प्रतिभा से महान विद्वान तक
उन्होंने अरबी, फारसी, उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में अद्भुत ज्ञान हासिल किया। महज 12 साल की उम्र में वे धार्मिक और दार्शनिक विषयों पर लेख लिखने लगे थे।
‘आज़ाद’ नाम बना पहचान
उन्होंने अपना उपनाम “आज़ाद” रखा, जो उनकी सोच और स्वतंत्र विचारों का प्रतीक था। यह नाम उनके भीतर की आज़ादी और औपनिवेशिक सोच के विरोध की आवाज था।
शिक्षा क्रांति के शिल्पकार
स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने देश की शिक्षा प्रणाली को आधुनिक दिशा दी। उन्हीं की पहल से आईआईटी, यूजीसी, संगीत नाटक अकादमी, साहित्य अकादमी जैसी संस्थाओं की नींव रखी गई।
धार्मिक सद्भाव और एकता के प्रतीक
मौलाना आज़ाद हमेशा हिंदू-मुस्लिम एकता के पक्षधर रहे। उनका मानना था कि भारत की ताकत उसकी विविधता में है। विभाजन के समय उन्होंने सांप्रदायिकता का विरोध करते हुए एकता का संदेश दिया।