महात्मा गांधी सिर्फ इतिहास के पन्नों में दर्ज नेता नहीं थे। वे लोगों की चेतना में बसे ‘बापू’ थे जो सही और गलत में फर्क करना सिखाते थे। उनकी पुण्यतिथि हमें याद दिलाती है कि देश सिर्फ आज़ादी से नहीं, मूल्यों से बनता है। आज जब समाज में हिंसा बढ़ रही है, असहिष्णुता गहरी हो रही है और संवाद की जगह टकराव ले रहा है तब गांधी जी का विचार पहले से ज्यादा प्रासंगिक लगता है। वे हमें सिखाते हैं कि विरोध भी गरिमा के साथ किया जा सकता है।
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्तूबर को हुआ था, वहीं देश की आजादी के बाद 30 जनवरी 1948 को उनका निधन हुआ था। महात्मा गांधी जी पुण्यतिथि उनके विचारों की याद दिलाती है। आइए जानते हैं उनके जीवन के बारे में, क्यों उन्हें बापू और राष्ट्रपिता का दर्जा मिला। यहां जानिए सबकुछ...
महात्मा गांधी की पुण्यतिथि कब मनाई जाती है?
महात्मा गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी को मनाई जाती है। 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली के बिड़ला भवन में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। नाथूराम गोडसे ने शाम की प्रार्थना सभा के दौरान गांधी जी पर गोलियां चलाईं। यह दिन भारत में शहीद दिवस (Martyrs’ Day) के रूप में भी मनाया जाता है। देशभर में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।
महात्मा गांधी को ‘बापू’ क्यों कहा गया?
‘बापू’ शब्द का अर्थ है पिता। महात्मा गांधी को यह नाम यूं ही नहीं मिला। इसके पीछे गहरे भाव और सामाजिक कारण थे।
गांधी जी सत्ता के नहीं, आम लोगों के नेता थे। वे राजा नहीं थे बल्कि मार्गदर्शक थे जो डांटते भी थे, समझाते भी थे।
उनका जीवन दिखावे से दूर था। सिर्फ धोती, लाठी, चश्मा यही उनकी सादगी भरी जिंदगी का हिस्सा था जो लोगों को अपनापन देती थी।
उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम को हिंसा से नहीं, नैतिक शक्ति से लड़ा। देश को उन्होंने सिखाया कि ताकत हथियारों से नहीं, चरित्र से आती है।
गरीब, दलित, महिलाएं, मजदूर गांधी जी सबके लिए बराबर खड़े रहे। इसलिए लोग उन्हें परिवार के मुखिया की तरह देखते थे।
महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता क्यों कहा जाता है?
महात्मा गांधी को सबसे पहली बार नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया था। बापू और राष्ट्रपिता का अर्थ लगभग समान है और उसका विस्तार बड़ा है। वह पूरे देश के पिता या बापू हैं, इसीलिए उन्हें राष्ट्रपिता कहा जाता है।
पुण्यतिथि पर क्या होता है खास?
- राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य नेता राजघाट पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं
- स्कूलों और संस्थानों में गांधी विचारों पर चर्चा
- अहिंसा, सत्य और शांति के संदेश का प्रसार
- देशभर में दो मिनट का मौन