बच्चे की दूसरों से आशाएं भी इस पर निर्भर करती है। यदि आप बच्चे को डांटती हैं, उस पर चिल्लाती हैं, तो ऐसे में उसके आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचती है। बच्चा इतना छोटा होता है कि वह कुछ भी कह पाने की स्थिति में नहीं होता है, लेकिन उसके चेहरे के भाव बता देते हैं कि उसके आत्म-सम्मान को ठेस पहुंची है। बच्चा झूठा और बनावटी नहीं होता है। उसमें केवल आत्म-सम्मान होता है, यही सच है। उसका आत्म-सम्मान प्यार से जुड़ा होता है, इसलिए वह अपने आस-पास के लोगों से केवल प्यार एवं लगाव चाहता है।
अक्सर पेरेंट्स बच्चे को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के सामने डांटते-फटकारते रहते हैं। लंबे समय तक ऐसा करने से बच्चे की मानसिकता, आत्म-विश्वास और रिश्तेदारों के साथ उनके व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ता है, इसलिए बच्चे को दूसरों के सामने डांटे नहीं। सबके सामने डांटने की बजाय अकेले में उसे समझाइए। हर बात पर चिल्लाने या डांटने की बजाय आप अपनी बात को कुछ अलग तरीके से भी समझा सकती हैं।
जैसा हम बच्चे के साथ व्यवहार करेंगे, वैसा ही वह व्यवहार दूसरों के साथ करेगा। ऐसे में अभिभावकों को बच्चे का मनोविज्ञान समझने की कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि आपके हर कार्य एवं व्यवहार का सीधा या परोक्ष प्रभाव आपके बच्चे के मनोविज्ञान पर पड़ता है। छोटे बच्चों में हमेशा सीखने और चीजों को जानने की यथोचित जिज्ञासा होती है। वह अपने हर सवाल का सही और औचित्यपूर्ण जवाब चाहता है, इसलिए आपको अपने बच्चे की हर एक बात को ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए। अपने बच्चे की भावनाओं को समझने की कोशिश करनी चाहिए।
यदि परिवार में बिखराव है या कलह रहती है, तो इसका असर भी बच्चों पर पड़ता है। इससे उसका आत्म-सम्मान आहत होता है। ऐसे बच्चे जिद्दी व्यक्तित्व, अहंकारी हो जाते हैं। खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। जो बच्चे अपने घर में असुरक्षित व डरा हुआ महसूस करते हैं, उनका आत्म-सम्मान कमजोर हो जाता है, इसलिए घर का माहौल खुशनुमा बनाइए। बच्चे का व्यक्तित्व अच्छी तरह से विकसित हो, इसके लिए उसे एक स्वस्थ माहौल देना जरूरी है।