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Lohri 2026: लोहड़ी क्यों मनाई जाती है , जानिए इसका इतिहास व महत्व क्या है?

Tue, 13 Jan 2026 07:45 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Lohri 2026 Importance: हर साल 13 जनवरी को ही लोहड़ी क्यों मनाई जाती है? लोहड़ी मनाने का कारण धार्मिक है या सांस्कृतिक, जानिए लोहड़ी पर्व से जुड़े रोचक तथ्य और मान्यताएं।
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क्यों मनाई जाती है लोहड़ी - फोटो : Adobe stock
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विस्तार
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Lohri 2026 Importance: उत्तर भारत की ठंडी रातों में जब आग के चारों ओर गीत गूंजते हैं, तिल और गुड़ की मिठास हवा में घुल जाती है और ढोल की थाप दिल तक उतर जाती है, वही क्षण लोहड़ी का होता है। लोहड़ी सिर्फ एक पर्व नहीं, यह धरती, किसान और सूर्य के बीच सदियों पुराना संवाद है। परंपरा के धागों से बुना यह उत्सव आज भी उतना ही जीवित है, जितना हमारे पूर्वजों के समय था। हर साल लोहड़ी जनवरी माह में एक खास तिथि को मनाई जाती है। आज लोहड़ी सोशल मीडिया, डिजिटल शुभकामनाओं और वर्चुअल समारोहों तक पहुंच गई है, लेकिन इसकी आत्मा आग के चारों ओर एकत्र होकर जीवन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है। आइए जानते हैं कि लोहड़ी को मनाने का कारण, इस दिन का इतिहास और महत्व क्या है।

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लोहड़ी 2026 कब है?

लोहड़ी हर साल 13 जनवरी को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में लोहड़ी मंगलवार 13 जनवरी 2026 को मनाई जा रही है। यह पर्व मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले आता है और सूर्य के उत्तरायण होने की घोषणा करता है।

लोहड़ी का इतिहास

लोहड़ी की जड़ें प्राचीन कृषि संस्कृति में हैं। यह पर्व रबी फसल की बुआई पूरी होने और अच्छी पैदावार की कामना से जुड़ा है। लोककथाओं में दुल्ला भट्टी का नाम लोहड़ी से गहराई से जुड़ा है। वह एक ऐसे नायक थे, जिन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और बेटियों की रक्षा की। आज भी लोहड़ी के गीतों में उसका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।
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लोहड़ी क्यों मनाई जाती है?

लोहड़ी मूल रूप से सूर्य, अग्नि और प्रकृति की आराधना का पर्व है। अग्नि को साक्षी मानकर लोग पुरानी नकारात्मकताओं को त्यागते हैं और नई शुरुआत का संकल्प लेते हैं। यह पर्व सिखाता है कि जीवन में गर्माहट रिश्तों से आती है, और मिठास साझा करने से बढ़ती है।

लोहड़ी का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व

लोहड़ी सामूहिकता का पर्व है। इसमें जाति, वर्ग और उम्र की दीवारें गिर जाती हैं। नवविवाहित जोड़े, नवजात शिशु वाले परिवारों के लिए यह उत्सव विशेष महत्व रखता है। रेवड़ी, मूंगफली, गजक और पॉपकॉर्न सिर्फ प्रसाद नहीं, बल्कि साझा खुशियों के प्रतीक हैं।

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