Lal Bahadur Shastri Jayanti 2025: लाल बहादुर शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री और “जय जवान, जय किसान” जैसे अमर नारे के जनक थे। उनका जीवन सादगी, ईमानदारी और त्याग का आदर्श उदाहरण माना जाता है। साधारण परिवार में जन्म लेने वाले शास्त्रीजी ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर आजादी के आंदोलन से लेकर प्रधानमंत्री पद तक का सफर तय किया। वे हर जिम्मेदारी को कर्तव्यनिष्ठा से निभाने वाले नेता थे, जिन्होंने कभी भी निजी स्वार्थ को अपने जीवन में स्थान नहीं दिया। उनकी जयंती पर आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी पांच रोचक बातें, जो उन्हें महान बनाती हैं। लाल बहादुर शास्त्री का जीवन हमें सिखाता है कि महानता धन या पद से नहीं, बल्कि ईमानदारी, सादगी और कर्तव्यनिष्ठा से मिलती है। उनका आदर्श आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा स्रोत है।
सादगी का जीवन
लाल बहादुर शास्त्री हमेशा सादगीपूर्ण जीवन जीते थे। उनके पास न तो निजी संपत्ति थी और न ही आलीशान घर। प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद उनके परिवार के पास कार तक नहीं थी। उनकी सादगी आज भी राजनीति में आदर्श मानी जाती है।
‘शास्त्री’ उपाधि
काशी विद्यापीठ से स्नातक करने पर उन्हें "शास्त्री" की उपाधि मिली। यह उपाधि इतनी प्रिय थी कि उन्होंने इसे जीवनभर अपने नाम से जोड़े रखा। यही नाम उनकी पहचान बन गया।
आजादी आंदोलन से जुड़ाव
कम उम्र में ही वे असहयोग आंदोलन और सत्याग्रह में शामिल हो गए थे। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने कई बार जेल की सजा भी काटी। यह उनके देशभक्ति और साहस का प्रमाण था।
"जय जवान, जय किसान" का नारा
1965 के भारत-पाक युद्ध और खाद्य संकट के दौर में शास्त्रीजी ने "जय जवान, जय किसान" का नारा देकर पूरे देश को एकजुट कर दिया। यह नारा किसानों और सैनिकों के प्रति सम्मान और राष्ट्र की मजबूती का प्रतीक बन गया।
सादगी में महानता
प्रधानमंत्री रहते हुए भी वे खुद को आम इंसान मानते थे। वे राशन कार्ड बनवाने के लिए लाइन में लगते थे और कभी अपने पद का दुरुपयोग नहीं करते थे। उनकी यही सादगी उन्हें जनता के दिलों के और करीब ले गई।