कन्या पूजन नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन यह केवल रीति-रिवाज नहीं, बल्कि नारी शक्ति और सम्मान का प्रतीक है। बच्चियों के न मिलने की स्थिति में कुछ उपाय अपनाकर आप पूरे विधि-विधान के साथ व्रत संपूर्ण कर सकते हैं।
अविवाहित स्त्रियों का पूजन
शास्त्र कहते हैं कि बच्चियों की अनुपस्थिति में अविवाहित स्त्रियों को भोजन कराकर भी मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। किशोरियों व बालिकाओं को भी इस दिन भोजन कराएं, दान आदि करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
कन्या की जगह नारियों का पूजन करें
यदि छोटी बच्चियां उपलब्ध न हों तो अपने घर या परिवार की नारियों को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन करें। बहन, बुआ, ननद, माता समेत घर की स्त्रियों को भोजन कराएं और उन्हें साड़ी, चुनरी, श्रृंगार सामग्री या भोजन भेंट करें।
जरूरतमंदों की सेवा करें
यदि कोई उपाय संभव न हो तो कन्या पूजन में छोटी बच्चियों की जगह गरीबों, असहायों और जरूरतमंदों को भोजन व दान दें। यह भी माता रानी को प्रसन्न करता है।
गौ पूजन
गाय को भी नारी स्वरूप और देवी का प्रतीक माना गया है। गाय को हरा चारा, गुड़ या भोजन खिलाकर नवरात्रि का पूजन संपूर्ण माना जाता है।
घट का पूजन
शास्त्रों में कलश यानी घट को भी देवी का ही रूप माना गया है। इसलिए बच्चियों की अनुपस्थिति में कलश पूजन करके नवरात्रि व्रत को पूर्ण किया जा सकता है।