अमेरिका के मिनेसोटा की समाजसेवी विक्टोरिया मैकवेन क्रीक के लिए एक आदर्श दिन का मतलब है- सुबह उठना, कुछ ऐसा करना, जिससे उनका परिवार और दोस्त जुड़े रहें। साथ ही दुनिया के लिए कुछ अच्छा करना, हंसना और झपकी लेना। दूसरी ओर, उनकी उद्यमी दोस्त शैली जीवन में आदर्श स्थिति को पूरी तरह से मिथक मानती हैं। उनका मानना है कि किसी भी तरह की ‘पूर्णता’ के पीछे भागने से केवल तनाव, पीड़ा और ढेर सारे आत्मसंदेह मिलते हैं। वह कहती हैं कि किसी एक दिन आप अपना सर्वश्रेष्ठ देती हैं और दूसरे दिन सब कुछ उथल-पुथल हो जाता है।
लेकिन सच कहें तो यही हमारे जीवन को अद्वितीय और दिलचस्प बनाता है। सोचकर देखिए, अगर समाज में सभी ‘पूर्णता’ वाले होते तो जीवन कितना उबाऊ होता। ये दोनों वक्तव्य दर्शाते हैं कि हर व्यक्ति के लिए ‘
आदर्श दिन’ की परिभाषा अलग हो सकती है। ऐसे में
ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी के अध्ययनकर्ताओं का एक अध्ययन ध्यान खींचता है। इसके अनुसार, एक ‘
परफेक्ट दिन’ सिर्फ ‘
अच्छा महसूस करने’ से कहीं ज्यादा है। इसका आशय है कि आप अपना समय व्यवस्थित तरीके से कैसे बिताती हैं?
आपका रूटीन ऐसा हो, जो आपको खुशी प्रदान करे और संतुष्टि की अनुभूति कराए। अध्ययन में कुछ और भी तथ्य उजागर हुए, जो हर एक दिन को परफेक्ट बनाने के लिए आवश्यक हैं।
मसलन, आपको परिवार एवं दोस्तों को कितना समय देना चाहिए?
एक्सरसाइज एवं खाने-पीने के लिए कितना वक्त निकालना चाहिए?
ऑफिस कार्य के लिए कितना समय देना उपयुक्त होता है?
स्क्रीन टाइम कितना होना चाहिए?
कहने का अर्थ है कि इन सभी गतिविधियों में जितना संतुलन होगा, आपका जीवन उतना ही खुशहाल होगा और आप कह पाएंगी कि हर एक दिन परफेक्ट है।
परिवार संग सुकून का अहसास
आखिर कौन होगा, जो अपने दिन को खुशनुमा नहीं बनाना चाहेगा। अब तो मनोवैज्ञानिक भी इसका एक सूत्र ढूंढ निकालने का दावा कर रहे हैं। दरअसल,
ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी के सामाजिक मनोवैज्ञानिक
डुनिगन फोक ने
अमेरिकी टाइम यूज सर्वे के 2013 से 2021 के बीच के डाटा का विश्लेषण कर महिला-पुरुषों की उन गतिविधियों के बारे में पता लगाने की कोशिश कि जो उन्हें अपेक्षाकृत अधिक खुशी देती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किए गए इस अध्ययन से पता चला कि परिवार संग समय बिताना सबसे ज्यादा खुशी देता है। जो लोग अपने परिवार के साथ कम से कम छह घंटे बिताते हैं, उससे उनका दिन आदर्श बनता है। क्या आपने कभी खुद से पूछा है कि परिवार क्यों महत्वपूर्ण है? स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया की दुनिया में हममें से कई लोग वास्तव में उन तरीकों से कम सामाजिक हो गए हैं, जो न केवल फायदेमंद हैं, बल्कि हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक भी हैं।
अमेरिकन जर्नल ऑफ हेल्थ प्रमोशन का सिग्ना अध्ययन संकेत देता है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग अकेलेपन के सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक है। शायद इसलिए मनोवैज्ञानिक अध्ययनों में यह बात सामने आ रही है कि पूरे दिन में स्क्रीन टाइम एक घंटे से अधिक नहीं होना चाहिए। इसके बदले जब आप अपने परिजनों के साथ क्वालिटी टाइम व्यतीत करती हैं तो आपको उनसे भावनात्मक समर्थन एवं स्नेह मिलता है। यह न सिर्फ रिश्तों को मजबूत बनाता है, बल्कि खुशहाली भी लाता है। कोरिया में तो एक कहावत बहुत प्रचलित है कि ‘जब परिवार खुश रहता है तो सब कुछ अच्छा होता है।’
दोस्त जरूरी हैं
परिवार के साथ रहने से समग्र मानसिक स्वास्थ्य में सुधार आता है। परिवार ही हमें वह बनाता है, जो हम हैं।
अमेरिका की पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ साइंस वन का एक अध्ययन कहता है कि तनाव, खुशी और स्वास्थ्य के स्तर का अनुमान लोगों के सामाजिक दायरे की ताकत से लगाया जा सकता है, न कि फिटनेस ट्रैकर पर एकत्र किए गए शारीरिक स्वास्थ्य डाटा से। यह दर्शाता है कि परिवार (या करीबी दोस्तों, जिन्हें आप परिवार कहती हैं) के साथ समय बिताना हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए कितना महत्वपूर्ण है। यह भी याद रखना होगा कि परिवार का मतलब सिर्फ रक्त संबंधी ही नहीं, बल्कि करीबी दोस्त या अभिभावक भी हो सकते हैं, जिन्हें आप परिवार मानती हैं।
रग्बी खिलाड़ी श्वेता शाही कहती हैं, “
जीवन में जब कभी नीरसता आती है तो दोस्तों से मिलने वाला भावनात्मक समर्थन हमें प्रेरित एवं चुनौतियों से पार पाने के लिए प्रोत्साहित करता है। हमारे अकेलेपन को दूर करता है। आत्मविश्वास एवं आत्मसम्मान को बढ़ाता है। जिन करीबी दोस्तों से हम महीनों नहीं मिल पाते, उनसे एक दिन भी अपने दिल की बात शेयर करके मन हल्का हो जाता है और हमारा दिन बन जाता है।”
ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी के अध्ययन में भी सामने आया कि दोस्तों के साथ कम से कम दो घंटे बिताने से खुशी का पारा कई गुना बढ़ जाता है, क्योंकि दोस्त हमारे मानसिक स्वास्थ्य एवं समग्र खुशी को बनाए रखने में काफी मदद करते हैं।
अमेरिकी जर्नल ऑफ साइकियाट्री 2020 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जिनके पास करीबी एवं विश्वासी मित्र होते हैं, वे जीवन से अधिक संतुष्ट होते हैं और अवसाद से ग्रस्त होने की आशंका भी कम होती है।