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कम नींद लेकर भी नेता कैसे रहते हैं तरोताजा?

Wed, 24 Aug 2016 11:23 PM IST
माइकल एस जैफी/ यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा, बीबीसी
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नींद हमारे लिए उतनी ही जरूरी है, जितनी हवा पानी और खाना। अगर नींद पूरी ना हो तो इसका सीधा असर हमारी सेहत पर पडता है। जब हम अपने नेताओं को रात दिन काम करते देखते हैं तो जेहन में सवाल उठता है कि ये सोते कब हैं? सोते हैं भी या नहीं? अगर सोते हैं तो कितनी देर सोते हैं? अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा छह घंटे सोने की कोशिश करते हैं। हालांकि वो अक्सर इतनी नींद नहीं ले पाते। अमरीका के ही पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का भी यही कहना है कि वो पांच से छह घंटे ही सो पाते हैं।
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सवाल ये है कि इतना कम वक्त सोने से क्या इन नेताओं के काम पर इसका असर नहीं पडता? सवाल ये भी है कि किसी इंसान को कितनी देर सोना चाहिए कि उसकी सेहत ठीक रहे? न्यूरोलॉजिस्ट मानते हैं कि नींद हमारी सेहत और काम दोनों पर अपना असर डालती है। 

बहुत कम ऐसे लोग हैं जो चार या पांच घंटे नींद लेकर ही दिन भर के काम निपटा लेते हैं। लेकिन, ज्यादातर लोगों को इससे ज्यादा नींद लेने की जरूरत होती है। ताकि वो बेहतर ढंग से काम कर सकें। नींद का हमारी सेहत पर क्या असर पड़ता है इस पर बहुत से तजुर्बे किये गए। पाया गया कि नींद हमारे दिमाग और सेहत पर गहरा असर डालती है।
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अमरीकन 'एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन' और 'द स्लीप रिसर्च सोसाइटी' के मुताबिक अच्छी सेहत के लिए औसतन सात घंटे सोना जरूरी है। जो लोग इससे कम सोते हैं वो अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ करते हैं और देर-सवेर उन्हें इसके नतीजे भुगतने पड़ते हैं। मोटे तौर पर नींद को दो हिस्सों में बांटा गया है। रैपिड आई मूवमेंट स्लीप और नॉन-रैपिड आई मूवमेंट। रैपिड आई मूवमेंट स्लीप और नॉन-रैपिड आई मूवमेंट।

नींद क्यों जरूरी?

- फोटो : Getty
रेपिड आई मूवमेंट नींद का वो दौर है जब हम गहरी नींद में होते हैं, जब हम ख्वाबों की दुनिया में चले जाते हैं। नींद का ये दौर हमारी याददाश्त को मजबूत बनाने के लिए बेहद जरूरी है। नींद का दूसरा दौर होता है नॉन-रेपिड आई मूवमेंट स्लीप। जानकारों ने नींद की इस स्टेज को और दो हिस्सों में बांटा है- लाइट स्लीप (N1और N2) और डीप स्लो स्लीप वेव (N3)। स्लो वेव स्लीप हमारे शरीर को सेहतमंद रखने के लिए जरूरी है।

दिन भर काम करने के बाद शरीर के जो हिस्से सुस्त पड़ जाते हैं उन्हें फिर से तरो-ताजा बनाने के लिए आराम जरूरी है। नींद के इस दौर में हमारे शरीर की कोशिकाओं को खुद को ताजा दम करने का मौका मिलता है। यानी शरीर और दिमाग दोनों को सेहतमंद रखने के लिए अच्छी नींद का आना जरूरी है। बढती उम्र के साथ कमजोर होती याददाश्त पर भी बहुत से रिसर्च किए गए हैं।

ये पाया गया कि जो लोग अपनी नींद के साथ नाइंसाफी करते हैं उनकी याददाश्त जल्दी कमजोर होती है। दरअसल जब हम सो जाते हैं तब हमारा दिमाग जमा की गई बातों में कांट छांट करता है। जो बातें काफी पुरानी हो जाती हैं उन्हें साफ करके दिमाग की स्टोरेज मेमरी में जगह बनाता है।

कम नींद लेने से सेहत पर इसका घातक असर होता है। ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। मोटापा बढ़ जाता है। आप शुगर के मरीज हो जाते हैं। दिल का दौरा पड़ने का डर बढ़ जाता है। 'द अमरीकन स्लीप फाउंडेशन' ने इस बारे में कई तजुर्बे किए हैं। इनमें से कई के नतीजे डराने वाले हैं। एक रिसर्च के मुताबिक नींद पूरी ना होने की वजह से लोग अक्सर ड्राइव करते हुए बहक जाते हैं और हादसों को दावत देते हैं। एक और रिसर्च में ये भी पाया गया है कि जो एथलीट भरपूर नींद लेते हैं, उनका परफॉर्मेंस बेहतर हो जाता है।
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छोटी-छोटी बातों का खयाल रखकर अच्छी नींद लेने में कामयाब हो सकते हैं आप

सभी खिलाड़ियों को पर्याप्त नींद दिलाई जा सके इसके लिए पेशेवर सलाहकार टीम में रखे जाते हैं। आप कुछ छोटी-छोटी बातों का खयाल रखकर अच्छी नींद लेने में कामयाब हो सकते हैं। पहला, जब आपके पास काम ज्यादा होता है तो उसे पूरा करने के लिए आप देर तक जागते हैं। भले ही आपको नींद आ रही हो तब भी आप जागते हैं। नींद को खुद से दूर करने के लिए चाय-कॉफी पीना शुरू कर देते हैं। लेकिन ये सही नहीं है। दरअसल देर तक जागने के बाद आपका दिमाग थकने लगता है। वो आराम करना चाहता है।

एडोनोसिन दिमाग में सोने की इच्छा को तेज करते हैं। लेकिन चाय-कॉफी में पायी जाने वाली कैफीन, नींद की राह में रोड़े अटकाते हैं। आपको नींद से दूर कर देते हैं। ऐसा मत कीजिए नींद आए तो फौरन सो जाइए। दूसरा, पॉवरनैप भी बहुत बार आपके लिए जरूरी और फायदेमंद होती है। दफ्तर में जब नींद आ रही हो तो बीस-तीस मिनट की पावर नैप या झपकी आपके बड़े काम की होती है।

अमरीका के 'नेशनल स्लीप फाउंडेशनट के मुताबिक कैनेडी से लेकर रीगन और जॉर्ज बुश तक, कमोबेश हर अमरीकी राष्ट्रपति, काम के दौरान झपकी लेते थे। तीसरा, आज तकनीक का जमाना है। आपके पास लैपटॉप है। स्मार्ट फोन हैं। ये आपको हर वक्त उलझाए रखते हैं। यहां तक कि कंपनी का काम खत्म करके आने के बाद भी घर से ही दफ्तर का काम चलता रहता है।

कंपनी की तरफ से आपको जरूरी रिमाइंडर्स आते रहते हैं। आप मोबाइल और लैपटॉप पर मसरूफ रहते हैं। नींद का ख्याल नहीं करते। ये गलत बात है। आप काम के साथ ही अपनी नींद को भी बराबर की तरजीह दें। क्योंकि अगर काम जरूरी है तो अच्छी सेहत भी जरूरी है। और अच्छी सेहत में नींद का बड़ा रोल है। सेहत अच्छी रहेगी तो जिंदगी भी खुशहाल रहेगी।
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