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कोरोना वायरस: काम करने के लिए कितने सुरक्षित रहेंगे दफ्तर, क्या बनी रहेगी वर्क फ्रॉम होम की आदत?

Tue, 19 May 2020 04:10 PM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
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क्या ऑफिस जाना अभी सुरक्षित है? - फोटो : Pexels
दुनिया के कई देशों में लॉकडाउन में अब ढील दी जाने लगी है। धीरे-धीरे दफ्तर भी खुलने लगे हैं। ऐसे में लोगों के मन में एक डर जरूर है कि क्या उनका ऑफिस जाना अभी सुरक्षित है। तमाम पुराने तौर-तरीकों के साथ ही अब एंप्लॉयीज को मॉनिटर करने के लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल में और इजाफा होने जा रहा है।

अब बिल्डिंग में एंट्री करते वक्त आपका तापमान लेने के लिए थर्मल कैमरे होंगे। साथ ही ऐसे कई ऐप्स या वियरेबल्स भी इस्तेमाल हो सकते हैं जो कि आपके किसी सहयोगी के ज्यादा करीब जाने पर आपको अलर्ट कर देंगे। दफ्तर जल्द ही आपको माइनॉरिटी रिपोर्ट मूवी का अहसास दिलाने वाले हो सकते हैं।
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कुछ साल पहले एम्सटर्डम की द एज बिल्डिंग को दुनिया की सबसे स्मार्ट और सस्टेनेबल यानी स्थायित्व भरी बिल्डिंग के तौर पर सबसे ज्यादा वोट मिले थे। अब सेंसरों के भरे दफ्तरों वाली यह बिल्डिंग एक तेजी से फैलने वाले वायरस के साथ जीने की नई सच्चाई के साथ खुद को ढालने की कोशिश कर रही है।

इस बिल्डिंग को बनाने वाली रियल एस्टेट फर्म के फाउंडर कोएन वैन ऊस्ट्रॉम ने बीबीसी को बताया कि कुछ तो ऐसे बदलाव हैं जिन्हें तत्काल लागू किया जा सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
एयर क्वालिटी
वह कहते हैं, 'दरवाजे फिलहाल हाथ से खोले जा सकते हैं, लेकिन वॉयस कंट्रोल या ऐप के जरिए इन्हें खोलना एक मामूली कदम होगा। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि वायरस इस तरह से न फैल पाए।'

वह कहते हैं, 'हमारे पास कैमरे हैं जिनसे पता चल सकता है कि कितने लोग फ्लोर पर हैं और सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए यह भी पता चल सकता है कि लोग एक-दूसरे से कितनी दूर खड़े हैं। अगर लोग एक-दूसरे के ज्यादा करीब आते हैं तो हम उन्हें फोन पर चेतावनी भी भेज सकते हैं।'

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work from home
ऊस्ट्रॉम बताते हैं, 'सभी को यह चीज पसंद नहीं आएगी और कई लोग इसे उनकी निजता में दखल मान सकते हैं, ऐसे में हमने अभी इसके इस्तेमाल का फैसला नहीं किया है।' दूसरी ज्यादातर बिल्डिंगों के उलट द एज पहले ही कर्मचारियों को एक फोन ऐप दे रही है जिसके जरिए वे यह जान सकते हैं कि ऑफिस का तापमान क्या है और एयर क्वालिटी कैसी है। साथ ही उन्हें ऑफिस की कैंटीन से लंच ऑर्डर करने की भी आजादी दी जा रही है।

इससे पहले एयर क्वालिटी पर किसी का फोकस नहीं था। ऊस्ट्रॉम कहते हैं कि अब यह माना जा रहा है कि अगर ताजी हवा पर्याप्त मात्रा मं नहीं होगी तो वायरस फैल सकता है और इस वजह से लोग अब इसे नोटिस कर रहे हैं।
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सीटिंग प्लान में भी बदलाव करना होगा ताकि सामाजिक दूरी के नियमों का पालन हो सके। लेकिन, रिसर्च फर्म वर्डान्टिक्स की स्मार्ट बिल्डिंग एक्सपर्ट सुसैन क्लार्क कहती हैं कि कंपनियां अपने कामकाजी तौर-तरीकों में शायद ही कोई बड़ा बदलाव करें।

वह कहती हैं, 'सीटों की एक-दूसरे से कम दूरी बनी रहेगी। हम जिस तरह की आर्थिक मंदी देख रहे हैं उसमें ज्यादातर कंपनियां और ऑफिस स्पेस ले पाने में असमर्थ होंगी। लेकिन, इस बारे में सोचा जरूर जाएगा और इन्हें संक्रमण मुक्त बनाने के लिए बार-बार साफ-सफाई कराई जाएगी।'
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वाइटल वायो जैसी कुच लाइटिंग कंपनियां सेफ डिसइनफेक्शन लाइटिंग जैसे उत्पाद पेश कर रही हैं। इनमें सफेद लाइट के साथ वायलट लाइट का इस्तेमाल किया जाता है ताकि सरफेस पर मौजूद कुछ बैक्टीरिया मारे जा सकें। इनका इस्तेमाल होटलों या ज्यादा लोगों वाले दफ्तरों में हो सकता है।

तापमान टेस्टिंग
फ्लिर टेक्नोलॉजी वैसे तो सालों से एयरपोर्ट्स पर इस्तेमाल होने वाले और पुलिस हेलीकॉप्टरों पर लगने वाले थर्मल कैमरे बना रही है। लेकिन, गुजरे कुछ महीनों में इनकी डिमांड में काफी तेज उछाल आया है। अब कंपनी के पास फैक्ट्रियों और कारोबारों की तरफ से डिमांड आ रही है।
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फ्लिर के वाइस प्रेसिडेंट (मार्केटिंग) एजरा मेरिल कहते हैं, 'अपने वर्कर्स और कस्टमर्स की सुरक्षा को लेकर चिंतित हर इंडस्ट्री इसमें दिलचस्पी दिखा रही है।' ये कैमरे अश्रु नलिका के पास पांच वर्ग मिलीमिटर के एरिया में तापमान लेते हैं। यह जगह त्वचा का तापमान लेने के लिए सबसे उपयुक्त मानी गई है। चश्मे पहने वाले लोगों को इन्हें उतारना पड़ता है।

इसकी एल्गोरिदम में दिन का वक्त, मौसम और दूसरी कई चीजों को ध्यान में रखा जाता है। मेरिल कहते हैं कि इस डिवाइस के साथ मेडिकल ग्रेड के थर्मोमीटर से तापमान लेना भी जरूरी है। इस टेक्नोलॉजी को हाल में ही अमेरिका की एक फैक्ट्री में टेस्ट किया गया और इस पर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं।

कैमरा तस्वीरें नहीं लेता है और इमेज के जरिए लोगों को पहचानना मुश्किल है, इसके बावजूद मेरिल मानते हैं कि इसे लेकर निजता के मसले सामने आ सकते हैं। कुछ जगहों पर इसे अवैध भी माना जा सकता है।

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क्या तकनीक ही जरूरी है?
लॉयर रवि नायक कहते हैं कि कारोबारों को केवल कहने के लिए तकनीक के इस्तेमाल को लेकर सतर्क रहना होगा। वह कहते हैं, 'क्या इससे यह पता चल सकता है कि कौन काम कर सकता है और कौन नहीं? और अगर ऐसा नहीं हो सकता तो यह तकनीक किस काम की? चूंकि यह मूल मानव अधिकारों में दखल देती है, ऐसे में इस तकनीक को इस्तेमाल करने से पहले इसके औचित्य को परखना होगा। मुझे नहीं लगता कि अभी ऐसा कुछ करना चाहिए।'
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बार्कलेज बैंक के चीफ एग्जिक्यूटिव जेस स्टेले ने कहा है कि बड़े महंगे शहरों में दफ्तरों में मौजूद हजारों कर्मचारियों का दौर शायद गुजर गया है। घर से काम करने का अनुभव हमें बता रहा है कि कई लोग घर से बहुत अच्छी तरह से काम कर सकते हैं। 

जाहिर है वैन ऊस्ट्रॉम इससे असहमत होंगे। वह सोचते हैं कि एक ऐसा हाइब्रिड मॉडल आ सकता है जहां ज्यादा लोग घर से काम करेंगे और एंप्लॉयर लोगों को दफ्तर आने के लिए लुभाने की कोशिश करेंगे।
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