हम सभी की दर्द सहन करने की क्षमता अलग-अलग होती है, पर ऐसा क्यों हैं? दरअसल, यह हमारे जीन पर निर्भर करती है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि आनुवांशिक तौर पर विभिन्नता लोगों में दर्द के प्रति संवेदनशीलता को भी प्रभावित करती है।
'पीएलओएस जेनेटि' पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में दावा किया गया है कि जिन लोगों को कम दर्द महसूस होता है, उनमें एक विशेष प्रकार के जीन का एक युग्म इसको नियंत्रित करने का काम करता है। लंदन के किंग्स कॉलेज द्वारा कराए गए इस अध्ययन में पुराने दर्द से जुड़े कुछ जीन का पता लगाया गया और अधिक प्रभावी दर्द निवारक उपचारों के लिए नया रास्ता सुझाया गया।
शोधकर्ताओं ने दर्द के प्रति संवेदनशीलता के संबंध में आनुवांशिक विभिन्नताओं का पता लगाने के लिए एग्जोमा सीक्वेंसिंग नामक नई तकनीक का इस्तेमाल किया। इसके तहत डीएनए का नए तरीके से अध्ययन किया जाता है।
प्रमुख अध्ययनकर्ता डॉ. फ्रांसेस विलियम्स ने कहा कि पुराना दर्द एक महत्वपूर्ण व्यक्तिगत और सामाजिक-आर्थिक बोझ है। हर पांच में से एक व्यक्ति अपनी जिंदगी में इसे कभी ना कभी महसूस करता है। वर्तमान में मौजूद दर्द निवारक उपचार या तो कम समय के लिए प्रभावी हैं या साइड इफेक्ट देने वाले हैं। इसलिए इस अध्ययन के माध्यम से दर्द से राहत के लिए एक नए दृष्टिकोण की संभावना एक रोमांचक विकास है।
माना जाता है कि जो लोग दर्द के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं, उन्हें भविष्य में दर्द की शिकायत होने की संभावना ज्यादा होती है। संवेदनशीलता के स्तर का पता लगाने के लिए शोधकर्ताओं ने 2,500 लोगों का परीक्षण किया। उनके बांह पर एक गरम उपकरण लगाया और उस पर लगा बटन तब दबाने के लिए कहा, जब उसका ताप असहनीय हो जाए। उसके बाद एग्जोमा सीक्वेंसिंग के जरिए दर्द के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील 200 लोगों और दर्द के प्रति सबसे कम संवेदनशील 200 लोगों के डीएनए का विश्लेषण किया। परिणाम में हर समूह में आनुवांशिक विभिन्नताओं के अलग-अलग पैटर्न पाए गए। दर्द के प्रति कम असंवेदनशील लोगों की तुलना में दर्द के प्रति संवेदनशील लोगों के डीएनए में कम विभिन्नता पाई गई।