वर्तमान जीवनशैली में कमर दर्द और स्पाइनल कॉर्ड से संबंधित समस्याओं से दफ्तर जाने वालों से लेकर कॉलेज में पढ़ने वाले तक परेशान हैं। समय रहते अगर इन्हें लेकर गंभीरता बदली जाए तो उम्र बढ़ने के साथ-साथ इनसे जुड़ी समस्याओं को कम किया जा सकता है।
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न्यूयॉर्क के ऑर्थोपेडिक सर्जन और 'कीज़ टू एन एमेजिंग लाइफः सीक्रेट्स ऑफ द सर्विकल स्पाइन' किताब के लेखक ने सीएनएन को ऐसे पांच उपायों की जानकारी दी है जिनकी मदद से स्पाइनल कॉर्ड से जुड़ी समस्याओं को शुरुआती दौर में ही कम किया जा सकता है और कमर दर्द से प्रभावी तौर पर छुटकारा पाया जा सकता है।
उठने-बैठने की मुद्रा रखें सही
आप किस तरह बैठते है, खड़े होते हैं और चलते हैं इसका प्रभाव आपकी स्पाइनल कॉर्ड पर सीधा पड़ता है। इसके अलावा, घंटों तक स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करने से भी गर्दन और कमर के लिए दिक्कत होती है। ऐसे में पॉश्चर पर ध्यान दें जिससे कमर दर्द या स्पाइनल कॉर्ड की समस्याओं को दूर किया जा सके।
सांसों से संबंधित व्यायाम
प्राणायाम और श्वास से संबंधित एक्सरसाइज भी स्पाइन समस्याओं से राहत दिलाने में मददगार हैं। सीधे बैठ जाएं जिससे रीढ़ की हड्डी सीधी रहे। उब दोनों हाथों को पेट के मध्य में रखें और पेट के भीतर की गतिविधियों को महसूस करते हुए लंबी सांस लें।
प्राणायाम के महत्व को आयुर्वेद से लेकर अमेरिकन कॉलेज ऑफ स्पोर्ट मेडिसिन के शोध में भी माना गया है कि रोज जस मिनट तक श्वास संबंधी व्यायाम रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं से दूर रखने में मदद करते हैं।
डाइट पर दें ध्यान
प्रोटीन, अनसैचुरेटेड फैट्स वाला आहार और सब्जियां मांसपेशियां मजबूत करते हैं जिससे रीढ़ की हड्डी को बल मिलता है। कमर दर्द अधिक रहता है तो बी कॉम्प्लेक्स और अमोगा 3 की अधिकता वाली डाइट बढ़ाएं या फिर डॉक्ट्री परामर्श से मल्टीविटामिन दवाएं लेना शुरू करें।
धूप में बिताएं समय
स्पाइनल कॉर्ड की समस्या से बचाव के लिए शरीर को धूप की आवश्यकता भी होती है। ऐसे में टैनिंग की परवाह किए बिना कम से कम 10 से 20 मिनट रोज धूप में बिताना फायदेमंद है।
नींद पर दें ध्यान
आप आवश्यकता से कम नींद लेते हैं या अधिक नींद लेते हैं, इसका आपकी रीढ़ की हड्डी से संबंध है। इसके अलावा, सही बिस्तर, तकिया आदि का चुनाव भी दर्द को कम में आपकी मदद कर सकता है।
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