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हैरतअंगेज! गर्भ में पल रहे बच्चे को भी डिस्टर्ब करता है मोबाइल

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अजन्मे बच्चे को कहीं आप नींद तो नहीं जगा रहे क्या आप जानती हैं आपके गर्भ में पल रहे बच्चे को आपसे किस तरह से खतरा हो सकता है। दरअसल, यह खतरा आपसे नहीं लेकिन आप जो फोन इस्तेमाल करती हैं, उससे हो सकता है। आपके मोबाइल फोन से निकलने वाली ध्वनियां आपके होने वाले बच्चे के सोने-जगने के चक्र को बिगाड़ सकती हैं।
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गर्भवती महिलाओं के भ्रूण पर एक शोध किया गया जिसमें सेलफोन और बीपर की आवाज से होने वाली उनकी प्रतिक्रियाओं को जांचा गया। शोधकर्ता डॉ बोरिस पेट्रिकवोस्की ने बताया,'' हम देखना चाहते थे कि फोन जैसे उपकरण से होने वाले बच्चों पर किस तरह प्रभाव पड़ता है। शोध में यह सामने आया कि अगर आप भी गर्भाशय में आराम कर रहे एक पर्यटक होते और आपको भी हर घंटे कोई जगाता रहता तो आपको भी अच्छा नहीं लगता। फोन की ध्वनि और वाइब्रेशन से शिशु कई बार चौंक कर जग जाते हैं जो उनके नींद चक्र में बाधा डालते हैं''। हालांकि अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि बार-बार चौंक कर जग जाने से शिशु की सेहत और महिला के गर्भ पर क्या असर पड़ता है।

क्या कहते हैं पुराने शोध

पुराने अध्ययनों में यह सामने आया है कि घर से ही काम करने वाली गर्भवती महिलाओं में औसत से अधिक गर्भ से जुड़ी समस्याएं होती है जैसे उच्च रक्तचाप, समय से पहले डिलीवरी और कमजोर वजन का शिशु। इनका काम ही ऐसा होता है कि इन्हें हर समय फोन और बीपर को अपने करीब रखना पड़ता है। उन्होंने कहा,'' हम यह नहीं कहते कि फोन और बीपर के अत्यधिक प्रयोग से गर्भ से जुड़े खतरे बढ़ रहे हैं लेकिन यह जरूर कह सकते हैं कि इससे भ्रूण का सामान्य स्वभाव चक्र बिगड़ रहा है।''

कैसे हुई ये रिसर्च

शोध में पाया गया कि 80 प्रतिशत महिलाएं हैं जो गर्भवती होने के समय घर से ही काम करती हैं। ऐसी ही 28 महिलाओं पर यह शोध किया गया था। सभी के सिर के पास ही फोन और बीपर रखा और पांच बार इसे पांच-पांट मिनट के अंतराल पर बजाया गया। इसी दौरान महिलाओं का अल्ट्रासाउंड कराया गया ताकि शोधकर्ता भ्रूण पर इसका प्रभाव जांच सकें।

27 से 41 हफ्तों के बीच के सभी शिशुओं में ध्वनि से चौंकने की प्रतिक्रिया देखी गई। इन प्रतिक्रियाओं में सिर घुमाना, मुंह खोलना और आंख झपकना शामिल था। जब इन उपकरणों को हर 10 मिनट पर बजाया गया तो 90 प्रतिशत भ्रूण में इसी तरह की घबराने वाली प्रतिक्रियाएं देखी गईं। हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि कई शिशुओं को इसकी आदत हो गई और 60 प्रतिशत शिशुओं की प्रतिक्रियाओं में गिरावट देखी गई।
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क्या निकलें रिसर्च के नतीजे

पेट्रिकवोस्की ने बताया,'' जाहिर तौर पर ऐसी और कई वजह होती हैं जिनसे शिशु चौंक कर जग जाते हैं लेकिन यह पहले भी सामने आ चुका है कि हवाई अड्डों के पास रहने वाली या अक्सर हवाई यात्राएं करने वाली गर्भवती महिलाओं के अजन्में शिशुओं में भी यही लक्षण देखें जाते हैं।

इसलिए यह साफ है कि बार-बार होने वाले शोर से बच्चे पर असर पड़ता है''। उन्होंने महिलाओं को सुझाव दिया है कि वे गर्भ के दौरान बच्चे के सिर के पास मोबाइल और बीपर रखने के बजाए अपने बैग में रखें। ये उपकरण जितना ज्यादा बच्चे से दूर रहेंगे उतना कम उन पर असर डालेंगे।

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