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फर्टिलिटी से जुड़े हैं ये सात भुलावे

Fri, 08 Mar 2013 04:13 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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आमतौर पर फर्टिलिटी को लेकर हम ऐसी कई धारणाएं बना लेते हैं जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं होता। फर्टिलिटी से संबंधित सुनी-सुनाई बातों के आधार पर हम मन ही मन परेशान होते हैं जबकि हम असलियत से कोसों दूर होते हैं।
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जानिए, गायनोकोलॉजिस्ट व फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. अर्चना धवन बजाज से बातचीत के आधार पर फर्टिलिटी से संबंधित ऐसे सात मिथकों के बारे में जिनकी असलियत कुछ और ही है।
 
1- इन्फर्टिलिटी की समस्या सिर्फ महिलाओं के साथ होती है।
आमतौर पर लोग ऐसा मानकर चलते ही कि अगर औलाद नहीं हो पा रही है तो महिला में ही कुछ कमी है जबकि इन्फर्टिलिटी की समस्या पुरुषों और महिलाओं में बराबर रूप से होती है।
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2- कम उम्र के लोगों में फर्टिलिटी अधिक होती है।
असलियत बहुत अलग है। महिलाओं के लिए गर्भधारण करने की सही उम्र 22 से 30 वर्ष की आयु है जबकि पुरुषों की यौन क्षमता का भी कम उम्र से कोई संबंध नहीं है।
 
3- पीरियड्स के तुरंत पहले या बाद संबंध बनाने से गर्भवती होने की संभावना अधिक होती है।
ऐसा बिल्कुल नहीं है बल्कि यह समय सेफ पीरियड माना जाता है जिसमें गर्भवती होने की संभावना बहुत कम होती है। पीरियड्स के 12वें दिन से 18वें दिन तक का समय सबसे अधिक उर्वर माना जाता है।
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4- सेक्स के दौरान पोजीशन का प्रभाव पड़ता है।
ऐसा कतई नहीं है। सेक्स की पोजीशन से गर्भ ठहरने का कोई संबंध नहीं है।
 
5- लगातार सेक्स से पुरुषों का वीर्य घटता है।
इस बात का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
 
6- हरी पत्तेदार सब्जियां और सेहतमंद डाइट से लड़का होने की संभावना होती है।
सेहतमंद डाइट से सेहतमंद बच्चा होता है, इसका उसके लिंग से कोई भी संबंध नहीं है।
 
7- एल्कोहल व यौन क्षमता बढ़ाने के नाम पर बिकने वाली दवाओं के सेवन से पुरुषों का वीर्य बढ़ता है।
यह सोच निराधार है। इनके सेवन से पुरुषों की यौन क्षमता और वीर्य पर नकारात्मक प्रभाव ही पड़ता है।

फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए डाइट में क्या लेना है, जानने के लिए यहां क्लिक करें।
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