पेरिस की गलियों में पोटैटो स्ट्राइप्स मशहूर हो गया
पेरिस में 19वीं सदी में जब मध्यमवर्गीय लोगों के पास कुछ नहीं होता था, तो वह आलू को छीलकर उसे तेल में तलकर किसी चटनी के साथ खा लिया करते थे। धीरे-धीरे यह लोगों के बीच स्ट्राट फूड के माध्यम से पहुंचा।
ऐसे ही मध्यमवर्गीय परिवारों ने इसे कमाई का जरिया बना लिया और पेरिस की गलियों में पोटैटो स्ट्राइप्स मशहूर हो गया और फिर इसमें कई तरह के प्रयोग होने लगे। जैसे-जैसे आलू के फ्राइज का स्वाद लोगों को अच्छा लगने लगा, वैसे ही इसके स्वामित्व पर भी खींचतान शुरू हो गई। कुछ देश लड़ने लगे।
स्पेन में यह 'पटाटास फ्रीटर्स' हुए तो फ्रांस में 'पोमेस फ्राइट्'
फ्रांस और बेल्जियम के बीच एक विवाद भी कई सालों तक चला कि फ्राइज का आविष्कार कहां किया गया था। दोनों देशों ने ही इस पर स्वामित्व का दावा किया। जब आलू के यह चटपटे फ्राइज क्षेत्रों को पार करने लगे, तो इनके नाम भी बदल गए। स्पेन में यह 'पटाटास फ्रीटर्स' हुए तो फ्रांस में 'पोमेस फ्राइट्'।
एक गली से निकले आलू के करारे फ्राइज आज दुनिया भर में लोगों की प्लेट पर सजते नजर आते हैं। वेफल फ्राइज, चिल्ली फ्राइज, स्वीट पोटैटो फ्राइज, करी चिप्स, क्रिंकल कट जैसे अनगिनत नामों से रेस्तराओं की शोभा बढ़ा रहे हैं। आम दिखने वाला आलू एक दिन दुनिया भर में इस तरह राज करेगा किसे मालूम था? आलू फ्राइज झट से भूख मिटाने के लिए सटीक हैं।