स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम की तरह ही होते हैं। लेकिन इसे लेकर लोगों के मन में डर अधिक है। सबसे पहले इस डर से उबरना जरूरी है।
इस मौसम में साधारण फ्लू और कोल्ड होना आम बात है, लेकिन एक बीमारी जो इस मौसम में तेजी से फैल रही है, वह है ‘स्वाइन फ्लू’। सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू के लक्षण एक जैसे ही होते हैं। इसलिए अगर फीवर या कोल्ड है, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह स्वाइन फ्लू हो सकता है।
साधारण बुखार की तरह इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों में लगातार नाक बहना, छींके आना या नाक का जाम होना जैसी दिक्कतें सामने आ सकती हैं। मांसपेशियों में दर्द, अकड़न, सिर में तेज दर्द, सर्दी और बहुत ज्यादा थकान महसूस होना, बुखार, गले में लगातार बढ़ती खराश भी स्वाइन फ्लू के लक्षण हैं। सामान्य बुखार और सर्दी जैसे लक्षण होने के कारण रोगी इस बीमारी की पहचान नहीं कर पाते हैं।
क्या है स्वाइन फ्लू
यह श्वसन तंत्र से जुड़ी एक बीमारी है, जो ए-टाइप इन्फ्लुएंजा वायरस से होती है। इसे एच-1 एन-1 नाम से भी जाना जाता है।
स्वाइन फ्लू एक संक्रामक रोग है, जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से नाक या मुंह के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। वायरस से संक्रमित चीजों को छूने से भी यह बीमारी हो सकती है।
देखा जाए तो किसी मरीज में स्वाइन फ्लू के इन्फेक्शन के लक्षण एक से सात दिन में विकसित हो सकते हैं। पीआर टेस्ट के माध्यम से पता चल जाता है कि मरीज को स्वाइन फ्लू है या नहीं। पांच दिन के इलाज में बीमारी ठीक हो जाती है।
उपचार से बेहतर है बचाव
इस बीमारी के होने का खतरा बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दिल, किडनी, डायबिटीज से ग्रस्त लोगों में अधिक रहता है। जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, वे भी स्वाइन फ्लू का शिकार हो सकते हैं।
इससे बचने के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति द्वारा छींकने, खांसने, हाथ मिलाने या चूमने से भी यह वायरस स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में जा सकता है।
साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना और संक्रमित लोगों से दूर रहना ही इस बीमारी का बचाव है। इसके अलावा खांसते या छींकते समय रुमाल का प्रयोग करें। गंदे हाथों से आंख, नाक या मुंह छूने से बचें और बाहर खाने से परहेज करें।
बासी खाना न खाएं। संक्रमित व्यकि्त से हाथ मिलाने या गले मिलने से बचें। इस बीमारी से डरने के बजाय सावधानी बरतना उचित रहेगा।