व्रत के दौरान अगर आप खुद को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो इसके लिए जरुरी है कि आप वही खाएं जो आपके स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर है।स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए उचित और संतुलित आहार का सेवन करें। हल्का संतुलित भोजन जल्दी पचता है। जो आपको दिनभर के काम करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा प्रदान करता है।
आयुर्वेद में पूरी तरह अनशन (व्रत) नहीं करना चाहिए, क्योंकि भूखे रहने से पेट में वात्-विकार हो जाता है। लेकिन सीमित प्रकार का भोजन करके उपवास करना आयुर्वेद की दृष्टि से उपयुक्त है, क्योंकि पेट की पाचन क्रिया को थोड़ा-सा आराम मिल जाता है।
उदाहरण के लिए, व्यक्ति सप्ताह में एक दिन कम भोजन करे या बिना नमक और बिना अन्न का भोजन करे। दूसरे शब्दों में वह आहार ले, जो योगीजन लेते हैं, जिसे सात्विक आहार कहते हैं। सात्विक भोजन से न तो इंद्रियों में उत्तेजना होती और न अधिक नींद आती है। अपने साप्ताहिक उपवास में, आप मीठे फल, सूखे मेवे या डेयरी उत्पाद के अलावा नमक तथा अन्न से रहित भोजन ले सकते हैं।