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ऑफिस हो या घर क्या इन चीजों को खाने से आपको भी सच में आती है नींद?

Mon, 14 Jan 2019 06:01 PM IST
मंजू ममगाईं बीबीसी हिंदी
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बहुत से लोग शिकायत करते हैं कि चावल खाने के बाद उन्हें नींद आने लगती है। कुछ लोगों को पूरी खाने से, तो बहुत से लोगों को मटन खाने से नींद आने की शिकायत रहती है। ये शिकायत खालिस हिंदुस्तानी हो, ऐसा भी नहीं है। विदेशों में भी बहुत से लोग कुछ चीजें खाकर नींद आने की शिकायत करते हैं। जैसे वहां बनने वाला टर्की नाम परिंदे का व्यंजन खाकर अक्सर लोग नींद आने की शिकायत करते हैं।

आखिर माजरा क्या है? क्या वाकई कुछ खास चीजों को खाने पर नींद आने लगती है। असल में इसके पीछे एक केमिकल का हाथ होता है इसका नाम है एल-ट्रिपटोफान। भारतीय खाने पर तो इतनी रिसर्च नहीं हुई है। मगर अमरीका में हुई रिसर्च के मुताबिक टर्की के मांस में एल-ट्रिपटोफान नाम का केमिकल काफी तादाद में मिलता है। इसी तरह समुद्री शेर कहे जाने वाले जीव के गुर्दे में भी एल-ट्रिपटोफान काफी तादाद में मौजूद होता है। अंडे की जर्दी, कॉड मछली और पोर्क चॉप में भी एल-ट्रिपटोफान खूब होता है।

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मगर जरूरी नहीं इन्हें खाकर लोगों को नींद का अहसास हो ही कुछ चीजें खाकर नींद आने के दावे पूरी तरह से सही मालूम नहीं होते। हमें एल-ट्रिपटोफान के असर को समझने के लिए इसकी जरूरत के बारे में समझना होगा.। असल में ये एक अमीनो एसिड है। अमीनो एसिड वो केमिकल हैं, जिनसे प्रोटीन बनता है। प्रोटीन से कोशिकाएं बनतीं हैं। जो हमारे शरीर के विकास और इसके बेहतर काम करने के लिए जरूरी होती हैं। यानी एल-ट्रिपटोफान हमारे शरीर की बुनियादी जरूरत है। मगर, ये हमारे शरीर में नहीं बनता। हम इसे खान-पान से हासिल करते हैं। इस अमीनो एसिड की मदद से सेरोटिनिन नाम का केमिकल बनता है सेरोटिनिन वो केमिकल है, जो हमारे अंदर खुशी का अहसास पैदा करता है।

मगर यही सेरोटिनिन ऐसा भी असर दिखाता है कि मधुमक्खियों को नींद आने लगती है। शायद एल-ट्रिपटोफान शरीर में पहुंचकर यही असर इंसानों में भी दिखाता है।हालांकि ये बात पक्के तौर पर नहीं कही जा सकती।ये सब जानकर आप को ऐसा लग रहा होगा कि एल-ट्रिपटोफान को लेने पर हमारी नींद न आने की बीमारी दूर हो सकती है।ये बात काफी हद तक सही भी है। इसकी मदद से बनाई गई कई दवाएं हमारी नींद न आने की बीमारी में कारगर साबित हुई हैं।हालांकि ये रिसर्च आज से 30 से भी ज़्यादा साल पुरानी हैं।

ये रिसर्च 1986 में हुई थी लेकिन 2002 में हुई सब से ताजा रिसर्च ये कहता है कि शरीर में एल-ट्रिपटोफान अमीनो एसिड की कमी से हमारी नींद खराब होती है लेकिन यहां ये बात ध्यान देने लायक है।अगर हम एल-ट्रिपटोफान को दवा में डालकर लेते हैं, तो इसका दूसरा असर होता है।अगर हमारे किसी खाने में ये होता है, तो इसका असर अलग होता है क्योंकि किसी भी भोजन में एल-ट्रिपटोफान अकेला केमिकल तो होता नहीं।

नतीजा ये कि भोजन में मौजूद दूसरे केमिकल, एल-ट्रिपटोफान का रास्ता रोकते हैं। हम खाने के जरिए जो एल-ट्रिपटोफान पाते हैं, वो सेरोटिनिन हार्मोन पैदा करे, इसके लिए जरूरी है कि इसका मुकाबला किसी और अमीनो एसिड से न हो।आप को ये एहतियात बरतना होगा कि आप एल-ट्रिपटोफान से लैस कोई खाना खाएं, तो खाली पेट खाएं। जिससे सिर्फ यही अमीनो एसिड आपके दिमाग तक पहुंचे और सेरोटिनिन बनाने में मददगार हो।कनाडा के ओंटैरियो में हुई एक रिसर्च में कुछ लोगों को एल-ट्रिपटोफान से लैस फूड बार खाने को दिए गए थे। इन लोगों ने बताया कि उन्हें खाने के बाद नींद अच्छी आई।

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असल में इस फूड बार में डेक्सट्रोज नाम की शुगर थी। ये हमारे शरीर को इंसुलिन नाम का हार्मोन छोड़ने के लिए प्रेरित करती है।इसकी मदद से हमारा शरीर दूसरे अमीनो एसिड भी सोख पाता है। एल-ट्रिपटोफान भी इसी प्रक्रिया से होकर दिमाग में सेरोटिनिन बनाने में मददगार होता है। हां, एल-ट्रिपटोफान से लैस भोजन करने के बावजूद भी आप को नींद आने ही लगे, ये जरूरी नहीं। हां इससे आप को सोने के लिए उतनी मशक़्कत नहीं करनी पड़ेगी, जितनी आम तौर पर करनी पड़ती है। यानी नींद न आने की हल्की-फुल्की दिक़्कत को एल-ट्रिपटोफान से लैस डाइट से दूर किया जा सकता है। मगर, गंभीर समस्या है तो इसे आप को दवा के तौर पर ही लेना होगा।

तो, अगली बार अगर आप को चावल खाने से नींद आए, तो सिर्फ चावल को इस के लिए जिम्मेदार मत ठहराएं। आप को नींद आने की वजह खाना नहीं कुछ और भी हो सकती है। हो सकता है कि आप सुबह जल्दी उठ गए हों। ये भी हो सकता है कि आप ज़्यादा काम कर चुके हों, और थकान महसूस कर रहे हों या फिर आप छुट्टी पर जाने से पहले दूसरे कई काम निपटाने के चक्कर में थक गए हों।इसके बाद आप ने भर पेट खाना खाय, तो जाहिर है नींद तो आएगी ही। एल-ट्रिपटोफान की थोड़ी सी तादाद भी आप को झपकी तो दिला ही सकती है।

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