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अपने होंठों के बारे में ये बातें जानते हैं आप?

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होंठ...सर्दियों में सूख जाते हैं और कभी कभी दांत इन्हें भोजन समझने की ग़लती करते हुए चबा जाते हैं। तो आख़िर होठों की ज़रूरत क्या है।
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पहले बात करते हैं इनकी अहमियत की। पैदा होने के बाद ही हमारा सबसे पहला कौशल होठों के ज़रिए दिखता है और वह है चूसना।

यह इतना मौलिक है कि मानों हम चूसने की कला सीखकर ही पैदा हुए हों और इसे सीखने की ज़रूरत ही नहीं है। यह लगभग सभी स्तनधारियों के लिए सच है।

पढ़ें विशेष रिपोर्ट

होंठ शिशुओं को स्तनपान करने की अनुमति देता है। शिशु के मुंह और गालों के साथ जो भी चीज़ संपर्क में आती है, शिशु का सिर उस तरफ मुड़ जाता है।

जैसे ही कोई चीज़ नवजात के होठों से छूती है, चूसने की भावनाएं सक्रिय हो जाती हैं। इसके बाद जीभ को काफी काम करना पड़ता है और होठ टाइट सील की तरह काम करते हैं ताकि शिशु मुंह में मौजूद चीज़ को निगल सके।

इसका मतलब है कि स्तन से या बोतल से दूध पीना नवजात शिशु का निष्क्रिय व्यवहार नहीं है।

यह एक तरह का वार्तालाप है, क्रमिक विकास की एक प्रक्रिया है, जिसके केंद्र में होते हैं होंठ।

होंठों को पढ़ो

भोजन करने और भाषण देने में होंठों की भूमिका अहम है। भाषा विज्ञान में इनकी ख़ास अहमियत है।

होंठ ध्वनि का उच्चारण करने में मदद करते हैं और इसकी वजह से व्यक्ति गले से निकली ध्वनि को वार्तालाप में बदलने में सक्षम हो सका है। विभिन्न उच्चारणों के लिए जीभ और होठों के बीच सामंजस्य ज़रूरी है।

यक़ीनन, बातचीत मानव जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन सभी मनुष्य मानेंगे कि इसमें उतना मज़ा नहीं, जितना चुंबन लेने में है।

हालाँकि चुंबन लेना विश्वव्यापी संस्कृति नहीं है। कई संस्कृतियों में यह नज़र ही नहीं आता है। डार्विन ने खुद इस बात का उल्लेख किया था कि कई संस्कृतियां हैं, जिनमें चुंबन नदारद है।

सर्वव्यापी नहीं है चुंबन

‘एक्सप्रेशन ऑफ़ इमोशन इन मैन एंड एनिमल्स’ में डार्विन लिखते हैं, "हम यूरोपीय लोग स्नेह दिखाने के लिए चुंबन के इस कदर आदी रहे हैं कि यह मान लिया गया कि यह मानव जाति का जन्मजात गुण है।"

लेकिन ऐसा नहीं है। न्यूज़ीलैंड के माओरी आदिवासी, पापुआ, ऑस्ट्रेलिया, सोमालिया, एस्किमो के बीच ‘चुंबन’ का कोई ज़िक्र नहीं था।

चाहे चुंबन सर्वव्यापी न हो पर इसकी जड़ें जीव विज्ञान में मिल सकती हैं, शायद विरासत में मिले आवेग और सीखे गए व्यवहार के संयोजन के रूप में।

अन्य प्रजातियां भी चुंबन करती हैं। मसलन चिंपांज़ी लड़ाई के बाद मेल-मिलाप करने के लिए चुंबन लेते हैं, जबकि बोनोबोस इसके लिए होठों के साथ-साथ जीभ का भी इस्तेमाल करते हैं।

वर्ष 2008 में ‘साइंटिफ़िक अमेरिकन माइंड’ में लेखक चिप वाल्टर ने ब्रितानी जीव विज्ञानी डेसमंड मॉरिस का हवाला देते हुए तर्क दिया कि चुंबन की उत्पत्ति संभवत: प्राचीन काल में चबाए गए भोजन को बच्चों को देने से हुई।

उदाहरण के लिए, चिंपाज़ी माताएं मुंह में खाना चबाने के बाद अपने होठों से छोटे चिंपाज़ी बच्चों के होठों को दबाती हैं और फिर उनके मुंह में इसे डाल देती हैं।
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संवेदनशील क्यों होते हैं होंठ

होंठ बेहद नाज़ुक और संवेदनशील होते हैं। होठों के स्पर्श का सिग्नल दिमाग़ के हिस्से - सोमाटोसेंसरी कॉर्टेक्स को मिलता है।

शोधकर्ता गॉर्डन गैलप के अनुसार, जिन संस्कृतियों में चुंबन की परंपरा नहीं है, "वहाँ सेक्स पार्टनर्स संभोग से पहले एक-दूसरे के चेहरे को चाटते, चूसते हैं या चेहरे पर चेहरा रगड़ते हैं।"

इसी तरह तथाकथित ‘एस्किमो किस’ सिर्फ नाक से नाक रगड़ना भर नहीं है।

संभव है कि चुंबन रोमांटिक पार्टनर्स की गंध लेने की प्रक्रिया के दौरान अस्तित्व में आया हो।

इससे मनुष्य इस बात का भी फ़ैसला करता है कि वह अपने पार्टनर को असल में कितना चाहता है।
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