गिनी में जानलेवा इबोला वायरस अपना रूप बदल रहा है। ये जानकारी वायरस पर नज़र रख रहे वैज्ञानिकों ने दी है।
फ्रांस के 'पाश्चर इंस्टीट्यूट' में शोधकर्ता ये पता लगाने में जुटे हैं कि क्या इबोला भविष्य में अधिक संक्रामक हो सकता है?
इबोला से सियरा लियोन, लाइबेरिया और गिनी में अब तक 22,000 से भी ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और करीब 8,795 लोगों की मौत हो चुकी है।
वैज्ञानिकों ने गिनी में सैंकड़ों की तादाद में इबोला मरीजों से लिए रक्त के नमूनों की जांच शुरू कर दी है।
वे इस बात को समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इबोला वायरस किस तरह बदल रहा है।
क्या इबोला पहले से अधिक आसानी से एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलने में सक्षम है? वैज्ञानिक इस तथ्य का भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
आनुवांशिकी विज्ञानी डॉ अनावज सकुंतभाई कहते हैं, "इबोला वायरस तेज़ी से बदल रहा है।"
वे कहते हैं, "इबोला के नए मरीजों का पता लगाने और उनको ठीक करना बेहद महत्वपूर्ण है। हमें अपने दुश्मन से लड़ने को लिए ये जानना बेहद ज़रूरी है कि इबोला वायरस किस तरह से बदल रहा है।"
उम्मीद है कि इस शोध से शायद इस बात का पता चल सके कि क्यों इबोला के कुछ मरीज तो ठीक हो जाते हैं, जबकि कुछ मरीजों की मौत हो जाती है?