अगर आपको भी सोने से पहले ई-बुक पढ़ने की आदत है तो आप अपनी नींद और सेहत को ख़राब कर रहे हैं।
हॉर्वर्ड मेडिकल स्कूल के चिकित्सकों के एक दल ने सोने से पहले किताबें पढ़ने वाले और ई-पाठकों के बीच तुलना करने के बाद यह चेतावनी दी है।
शोधकर्ताओं ने देखा कि रोशनी वाली ई-बुक पढ़ने वाले व्यक्ति को अच्छी नींद नहीं आई और वह सुबह ज़्यादा थका हुआ भी था।
विशेषज्ञों के मुताबिक़ बिना रोशनी वाली ई-बुक पढ़ने से कोई ख़तरा नहीं हैं।
रोशनी से ख़तरा
हमारा शरीर दिन और रात का फ़र्क़ समझने के लिए प्रकाश का उपयोग करता है। हमारा शरीर उसी अनुरूप में व्यवहार करता है।
लेकिन स्मार्टफ़ोन, टेबलेट और एलईडी प्रकाश से मानव शरीर का रुटिन प्रभावित होता है।
शाम के वक्त रोशनी नींद के हारमोन 'मैलाटॉनिन' का बनना रोक देती है या कम कर देती है।
इस प्रयोग में 12 लोगों को दो सप्ताह तक नींद की लेबोरैटरी में रखा गया। इन लोगों ने पांच दिन किताबें पढ़ीं और पांच दिन आईपैड के ज़रिए ई-बुक पढ़ी।
नियमित रूप से लिए गए ख़ून के नमूनों से पता चला कि ई-बुक पढ़ने से नींद के हारमोन 'मैलाटॉनिन' बनने में कमी आई।
इन लोगों को सोने में ज़्यादा वक्त लगा, गहरी नींद नहीं आई और अगली सुबह ज़्यादा थकावट महसूस हुई।
इन निष्कर्षों को नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंसेज़ के जर्नल में प्रकाशित किया गया है।