दिवाली के सेलिब्रेशन के दौरान हम जितनी भी मौज-मस्ती करें और खुशियां बाटें पर इस मौके पर पटाखे, शोर-शराबा, प्रदूषण आदि अस्थमा के मरीजों का दम घोटने के लिए काफी हैं।
ऐसे में अगर आपको यह बीमारी है तो इस त्योहार पर सेलिब्रेशन के साथ-साथ थोड़ी सावधानियां भी आपके लिए बेहद जरूरी हैं जिससे सांस लेने में तकलीफ, कफ आदि समस्याओं से प्रभावी तरीके से बचाव किया जा सके।
पटाखों से बरतें दूरी
दिवाली पर दीयों की जगमगाहट आपको जितना सुख देगी पटाखों से निकलने वाली गैस आपके लिए उतनी ही हानिकारक हैं। पटाखों में इस्तेमाल होने वाले लीड, मेगनीस, कॉपर, जिंक, पोटेशियम के अलावा कई हानिकारक रसायन वातावरण को प्रदूषित कर देते हैं। ऐसे में दमा के मरीजों के लिए वातावरण में मौजूद प्रदूषण जहर का काम करता है और उनमें श्वास संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में सेहतमंद दिवाली के लिए प्रदूषण मुक्त दिवाली का रास्ता चुनें और पटाखों से दूरी बरतें।
इनहेलर रखें साथ
आप इस त्योहार पर अपना कितना भी बचाव क्यों न कर लें लेकिन प्रदूषित वातावरण में अस्थमा का दौरा कभी भी हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि आप अपना इनहेलर और जरूरी दवाएं अपने साथ ही रखें। अगर आप पहले से दवाएं ले रहे हैं तो अपनी रुटीन और चिकित्सा में जरा भी लापरवाही न बरतें।
डाइट पर दें ध्यान
त्योहारों पर डाइट का संतुलन बिगड़ना कोई बड़ी बात नहीं है पर दमा के रोगियों के लिए संतुलित डाइट का कोई अन्य विकल्प नहीं है। बहुत अधिक ऑयली भोजन और कोल्ड ड्रिंक्स से दूरी बरतें। अगर आप धूम्रपान करते हैं तो कुछ दिनों के लिए इसपर नियंत्रण रखें क्योंकि सिगरेट पीने वाले लोगों को अस्थमेटिक अटैक की आशंका अधिक होती है।
श्वास के व्यायाम करें
हर सुबह श्वास संबंधी योग क्रियाएं और व्यायाम भी इस स्थिति में दमा के रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद रहेंगी। लंबी सांस लेने और छोड़ने के अलावा अनुलोम-प्रतिलोम, नेती, भ्रामरी, कपालभाति जैसे प्राणायाम का अभ्यास भी फायदेमंद है।