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कमरे में बत्ती नहीं बुझाते तो जानें यह नुकसान

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अगर आप सोते वक्त भी कमरे में रोशनी नहीं बंद करते हैं या जीरो पावर का बल्ब जलाकर सोते हैं तो यह आपकी सेहत के लिए बड़े खतरे की वजह हो सकता है।
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आपके बेडरूम की मद्धिम रोशनी भी स्तन कैंसर की दवाओं का असर ख़त्म कर सकती है। अमरीका में एक चूहे पर किए गए परीक्षण दिखाते हैं कि अगर स्ट्रीट लाइट जैसी कम रोशनी भी हो तो टैमोक्सिफ़ेन दवा के लिए ट्यूमर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है।

स्मार्टफोन और टेबलेट से भी नुकसान

ये अध्ययन टुलाने यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है। इसमें स्मार्टफ़ोन से लेकर टैबलेट की रोशनी और अन्य कृत्रिम रोशनियाँ भी शामिल हैं।

इस शोध के बारे में जानकारी एक कैंसर रिसर्च पत्रिका में छपी है।

शोध कहता है कि रोशनी से सोने के समय बनने वाले हॉर्मोन पर असर पड़ता है। इसकी वजह से कैंसर की कोशिकाएँ भी प्रभावित होती हैं।

टैमोक्सिफ़ेन दवा से स्तन कैंसर के उपचार में काफ़ी अहम मोड़ आया था। इस दवा से लोगों की आयु बढ़ गई थी और बचने की संभावना भी कई गुना बढ़ी थी। इस दवा को खाने से एस्ट्रोजेन हॉर्मोन कैंसर का ट्यूमर और नहीं बढ़ पाता है, हालाँकि कैंसर की कोशिकाएँ आगे चलकर इस दवा के लिए भी प्रतिरोधक हो जाती हैं।

डॉक्टर स्टीवन हिल के अनुसार, "अगर आप सात घंटों तक सोते हैं मगर आईपैड या कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं या फिर टीवी देखते हैं तो वे नीली तरंगें मेलेटोनिन का बनना एक से डेढ़ घंटे तक रोक देती हैं। इसलिए आपको सात की जगह साढ़े पाँच ही घंटों तक मेलेटोनिन मिलता है।"

शोधकर्ता ये देखना चाहते थे कि शरीर के 24 घंटे के चक्र का टैमोक्सिफ़ेन दवा के लिए बनने वाली प्रतिरोधक क्षमता पर क्या असर पड़ता है।
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नींद से है संबंध

उन्होंने अपना अध्ययन नींद को बढ़ाने वाले हॉर्मोन मेलेटोनिन पर केंद्रित किया। ये हॉर्मोन शाम से बनने लगता है और रात भर उसका स्तर बढ़ता जाता है। सुबह के समय फिर उसका स्तर गिरता है।

मगर इस बीच शाम की कृत्रिम रोशनी से इस हॉर्मोन का स्तर गिर सकता है।
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