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खाने में खुशबू के साथ स्वाद भी बढ़ाते हैं मसाले, जानें लौंग और दालचीनी के गुण

Thu, 27 Sep 2018 10:32 AM IST
डॉ. विनोद वर्मा, आयुर्वेद विशेषज्ञ
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आयुर्वेदिक दष्टि से दालचीनी की तासीर गर्म और लौंग ठंडी तासीरवाली होती है। लौंग और दालचीनी दोनों से पेट की गड़बड़ी ठीक होती है।आयुर्वेदिक पाक-कला में मसालों का समुचित उपयोग करना जरूरी है। इसके लिए मसालों के गुणधर्म का ध्यान रखना आवश्यक है।
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दालचीनी : इसका पेड़ 7 से 10 मीटर ऊंचा होता है। इसकी छाल मसाले के लिए प्रयोग की जाती है। यह दो प्रकार की होती है- एक पतली और दूसरी मोटी। एक का रंग ललछौंहा तथा दूसरे का गहरा भूरा। मोटी दालचीनी पतली से अधिक तीखी और स्वाद देने वाली होती है। आयुर्वेदिक दष्टि से दालचीनी की तासीर गर्म होती है। दालचीनी के पत्तों को तेजपात कहते हैं, जो चावलों को सुगंधित बनाने के काम में लाए जाते हैं
 
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लवंग या लौंग : लौंग का पेड़ बहुत बड़ा होता है।  7-8 साल का होने पर इस पर पहली कली आती है। जब इस पेड़ की उम्र 30 से 60 वर्षों के बीच होती है, तो इस पर लौंग की फसल सर्वाधिक आती है। इन कलियों को तब तोड़ लिया जाता है, जब ये हरेपन से गुलाबी रंग की होने लगती हैं। आयुर्वेदिक दृष्टि से लौंग ठंडी तासीरवाली होती है। लौंग और दालचीनी दोनों कीटनाशी पदार्थ हैं और इनसे पेट की गड़बड़ी ठीक होती है।
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