कैंसर की बीमारी का शुरु में ही पता चलना ज़रूरी होता है और देर से पता चलने पर यह घातक हो जाता है।
लेकिन वैज्ञानिकों ने एक सांस की जांच का एक साधारण तरीक़ा खोज निकाला है जिससे पता चल जाएगा कि पेट के मरीज को कैंसर होने की कितनी संभावना है।
यह जांच सांस में छोटे-छोटे रासायनिक पदार्थों का पता लगाता है जिससे यह पता चलता है कि किस व्यक्ति में कैंसर के पूर्व लक्षण मौजूद हैं।
अभी यह जांच अपने शुरुआती चरण में है। लेकिन, विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह जांच बड़े पैमाने पर सफल रही तो मरीजों का कैंसर के शुरुआती दौर में ही इलाज़ हो सकता है।
लेकिन इसके प्रमाणिकता के लिए अभी और भी काम करना है। यह शोध 'गट' नाम के जर्नल में छपा है।
अधिकांश पश्चिमी देशों में पेट के कैंसर के बारे में देर से पता लगता है, तब तक मरीज के बचने की संभावना कम हो जाती है।
इसका पता इसलिए भी देर से चलता है क्योंकि लोग अपच और दर्द को कोई अन्य बीमारी मान लेने की ग़लती हो जाती है।