विशेषज्ञों का कहना है कि बोटॉक्स ट्रीटमेट से युवाओं का भावनात्मक विकास बाधित हो सकता है।
जर्नल ऑफ़ ऐस्थेटिक नर्सिंग के मुताबिक़ ब्रिटेन में 25 साल के कम उम्र के लोगों में त्वचा की झुर्री कम करने के लिए बोटॉक्स इंजेक्शन का चलन बढ़ा है।
इसकी शोधकर्ता हेलेन कोलर कहती हैं कि टीवी रियलिटी शो और सेलीब्रेटी कल्चर युवाओं को इस तरफ़ आकर्षित कर रहे हैं।
कोलर कहती हैं, "बतौर इंसान कई तरह के भावनाओं को जाहिर करने की हमारी क्षमता चेहरे के हावभाव पर निर्भर करती है।"
वह कहती हैं, "अगर आप चेहरे से उन सारे भावों को मिटा देते हैं तो इससे सामाजिक और भावनात्मक विकास रुक सकता है।"
वहीं विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि कुछ बोटॉक्स क्लीनिक वित्तीय लाभ को ही प्रथामिकता देते हैं।
कोलिर के अनुसार अधिकतर टाक्सिन का प्रभाव अस्थाई होता है और शोध बताते हैं कि इंजेक्शन से त्वचा पूरी तरह बेहतर नहीं होती।
कार्डिफ विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान के शोधकर्ता डॉक्टर माइकल लेविस कहते हैं, "हम अपने चेहरे से महसूस होने वाली भावनाओं को जाहिर करते हैं।"
वो कहते हैं, "हम मुस्कुराते हैं क्योंकि हम ख़ुश हैं, लेकिन मुस्कुराना भी हमें ख़ुशी देता है।"
ब्रिटिश असोशीएशन ऑफ़ एस्थेटिक प्लास्टिक सर्जन्स के अध्यक्ष राजीव ग्रोवर बोटॉक्स ट्रीटमेंट नैतिक रूप से ग़लत मानते हैं।