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विश्व आर्थराइटिस दिवसः शरीर अकड़े तो रहें सावधान

Fri, 12 Oct 2012 08:35 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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सुबह सोकर उठने पर शरीर अकड़ा हुआ महसूस होता है। मुट्ठी बांधने में दिक्कत होती है। अंगुलियों के जोड़ों में दर्द होता है तो यह रुमेटायड आर्थराइटिस के लक्षण हो सकते हैं। रुमेटोलॉजिस्ट्स का कहना है कि इस तरह के लक्षण होने पर तुरंत इलाज बहुत जरूरी है। रक्त में रुमेटायड फैक्टर, एक्स-रे जांच और एंटी सीपी जांच से रुमेटायड आर्थराइटिस का पता लगाया जा सकता है।
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केजीएमयू के रुमेटोलॉजी विभाग के डॉ. पुनीत के अनुसार, अस्पतालों की ओपीडी में 70 फीसदी रोगी शरीर के अलग-अलग जोड़ों में दर्द की समस्या लेकर आते हैं। इसमें घुटने के आर्थराइटिस के रोगियों के संख्या सबसे ज्यादा है। यदि रोग शुरू होने के एक वर्ष के अंदर निदान कर लिया जाता है तो ये रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है।

उन्होंने बताया कि 20 से 30 फीसदी मरीज समुचित इलाज न मिलने के कारण स्थाई रूप से विकलांग हो जाते हैं।
ये बीमारी किसी भी आयु वर्ग को हो सकती है। महिलाओं में प्रसव के बाद या फिर संक्रमण के दौरान रुमेटायड आर्थराइटिस के लक्षण दिखते हैं। रक्त की जांच और शारीरिक लक्षणों के आधार पर इस रोग की पहचान होती है। इसके बाद इलाज से मरीज को दर्द से निजात दिलाई जा सकती है।
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डॉ. पुनीत ने बताया कि आर्थराइटिस के अलावा बीमारी ल्यूपस (एसएलई) जानलेवा है। यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता के उलटा (ऑटो इम्यून डिजीज) काम करने के कारण होती है। जिसमें त्वचा, गुर्दे, लिवर और दिमाग पर भी असर होता है। मरीज की मौत होना इस बीमारी में कॉमन है। डॉ. पुनीत के अनुसार सी रिएक्टिव प्रोटीन, रुमेटायड फैक्टर की जांच से आर्थराइटिस होने का पता लगाया जा सकता है।

मोटापा बढ़ा रहा आस्टियो आर्थराइटिस
मोटापा और शारीरिक श्रम में कमी आस्टियो आर्थराइटिस को बढ़ावा दे रही है। बढ़ते वजन का असर घुटनों पर होता है क्योंकि यही पूरे शरीर का भार उठाते हैं। आर्थोपैडिक सर्जन डॉ. संजय श्रीवास्तव ने बताया कि आस्टियो आर्थराइटिस का सबसे ज्यादा असर घुटनों में होता है। बढ़ता मोटापा और शारीरिक श्रम में कमी के कारण यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है।

उन्होंने बताया कि यदि घुटनों में दर्द के साथ सूजन हो तो विशेषज्ञ चिकित्सक से मिलना बहुत जरूरी है क्योंकि सूजन के कई कारण हो सकते हैं। शरीर के वजन को काबू में रखकर आर्थराइटिस से बच सकते हैं। यह तरीका आर्थराइटिस से बचाव भी करता है और उसका इलाज भी है। इसके अलावा घुटनों के जोड़ों को बदलवाकर (नी रिप्लेसमेंट) इस बीमारी और विकलांगता से हमेशा के लिए निजात पाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि उम्र भर विकलांग होकर जीने से अब छुटकारा मिल चुका है।
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आर्थराइटिस का कारण
- शरीर का बढ़ता वजन
- शारीरिक श्रम में कमी
- बुढ़ापा

ऐसे करें बचाव
-पतले और मुलायम सोल के जूते पहनें
-स्पोर्ट्स शूज घुटने के जोड़ों को झटका लगने से बचाते हैं
-घुटने या कूल्हे के दर्द से बचने के लिए चलते समय छड़ी का इस्तेमाल करें
-घर के काम, बागवानी आदि एक साथ न करें
-घुटनों को मोड़ कर ज्यादा देर तक काम न करें
-घुटनों के नीचे तकिया रखकर न सोएं
-दर्द होने पर पैर फैला कर सोएं
-महिलाएं ऊंची एड़ी की सैंडिल या चप्पल न पहनें
-घुटनों को कार्यशील रखें
-सीढ़ियों पर चढ़ते समय सहारा जरूर लें
-दर्द होने पर गर्म पानी या बर्फ से सिंकाई करें
-दर्द दूर करने के लिए घुटनों में दवा लगा सकते हैं

ध्यान रखने वाली बातें
-हर मरीज जिसका यूरिक एसिड बढ़ा हो उसे गाउट नहीं होता।
-रुमेटायड आर्थराइटिस के रोगियों को धूम्रपान और अल्कोहल नहीं लेना चाहिए।
-गाउट के रोगियों को लाल मांस और अल्कोहल छोड़ देना चाहिए।
-यूरिक एसिड के कारण गठिया हो तो दिन में कम से कम चार लीटर पानी पीना चाहिए।
-गाउट के रोगियों को नींबू, संतरा जैसी खट्टी चीजें खानी चाहिए।
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