एड्स रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाने और सरकार की योजनाओं की जानकारी आमलोगों तक पहुंचाने के लिए अब एमटीएनएल और बीएसएनएल की सेवाएं ली जाएंगी।
दूरसंचार के माध्यम से जनता को एड्स कंट्रोल विभाग के कार्यक्रम, जांच केंद्रों और रोकथाम के तरीकों का पता चल सकेगा।
मोबाइल संदेशों के जरिए रोकथाम
इस संदर्भ में बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन और सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर करेंगे। माना जा रहा है कि इससे एड्स से बचाव के लिए के लिए सही और पूरी जानकारी का विस्तार आमजन के बीच संभव हो सकेगा।
सूत्रों का कहना है कि सरकार शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में तेजी से फैल रहे एड्स को काबू में लाने के लिए मोबाइल फोन को जागरूकता का माध्यम बनाना चाहती है।
इनके माध्यम से राष्ट्रीय एड्स रोकथाम कार्यक्रम को सफल बनाया जा सकता है। तो दूसरी ओर देश में एड्स के कारण एक भी मौत नहीं हो इस लक्ष्य को ध्यान में रखकर प्रचार प्रसार को मजबूत बनाया जा रहा है।
वर्तमान में एड्स कंट्रोल विभाग की ओर से इस बीमारी की रोकथाम के लिए 1131 एसटीआई क्लीनिक, 1137 ब्लड बैंक, 15 हजार समेकित परामर्श और जांच केंद्र, 425 एआरटी केंद्र और 870 लिंक एआरटी केंद्र चलाए जा रहे हैं। जो लोगों को बचाव, सावधानी, सहायता व उपचार की सुविधाएं मुहैया कराती हैं लेकिन इसकी जानकारी सभी मरीजों को नहीं है।
फिलहाल एमटीएनएल व बीएसएनएल की सेवाओं पर
एड्स कंट्रोल विभाग के सूत्रों का कहना है कि देश भर में खासतौर पर एचआईवी शिकार लोगों तक जानकारी पहुंचाने का यह बेहतर माध्यम साबित हो सकता है। इसलिए एमटीएनएल और बीएसएनएल की सेवाओं पर पहले पहल ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। देश के करीब 21 लाख लोग एचआईवी के मरीज हैं।
यह किसी एक देश में तीसरा सर्वाधिक एचआईवी मरीजों की संख्या है। इनमें भी 15 से 49 साल के बीच करीब 90 फीसदी लोग इसके शिकार हैं।
यह आयु वर्ग मोबाइल, एसएमएस, ईमेल जैसे संचार माध्यमों का सर्वाधिक इस्तेमाल करता है। इनके बीच तकनीक की जानकारी भी अधिक है। इसलिए सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्रालय की सहायता से एचआईवी बचाव संबंधी जानकारी फैलाने का निर्णय लिया जा रहा है।