हरदोई। सूबे की सत्ता भले ही बदल गई हो लेकिन अफसराें का रवैया बदलने का नाम नहीं ले रहा। स्वाइन फ्लू जैसी गंभीर बीमारी की दस्तक पर स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदार सतर्कता बतरने के स्थान पर पूरे मामले की लीपापोती में लगे हुए हैं। सतर्कता के नाम पर सीएमओ ने सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के जिम्मेदाराें को पत्र भेजकर अपने कर्त्तव्याें की इतिश्री कर ली। और तो और, सीएमओ यह मानने को भी तैयार नहीं कि जिस वृद्ध की स्वाइन फ्लू की चपेट में आकर मौत हुई है उसे इस बीमारी ने जिले में ही जकड़ा था।
शाहाबाद कस्बे के मोहल्ला मौलागंज निवासी 58 वर्षीय शकील की मौत मंगलवार को स्वाइन फ्लू से हो गई थी। इसके साथ ही जनपद में स्वाइन फ्लू की
दस्तक की पुष्टि भी हो गई थी। आनन फानन ही चिकित्सकाें की एक टीम भेजकर शकील के अन्य परिजनाें का भी स्वास्थ्य परीक्षण कराया था और दवा भी वितरित कराई थी। स्वाइन फ्लू का मामला सामने आने के बाद उम्मीद थी कि स्वास्थ्य महकमा इसको लेकर सतर्कता बरतेगा और लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाएगा। इस मामले में सीएमओ डॉ पीके चतुर्वेदी ने शकील के जनपद में स्वाइन फ्लू से ग्रस्त होने की बात को ही खारिज कर दिया। डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि शकील की तबियत 25 जून को बिगड़ी थी। इसके पांच दिन बाद लखनऊ के मेडिकल कॉलेज में उसके स्वाइन फ्लू से ग्रस्त होने की पुष्टि हुई। उनका तर्क है कि स्वाइन फ्लू का अटैक 4-5 दिन में होता है। ऐसे में शकील को भी स्वाइन फ्लू लखनऊ मेडिकल कॉलेज में भर्ती रहने के दौरान होने की बात सीएमओ ने कही। उधर दूसरी ओर सीएमओ ने सतर्कता के नाम पर लकीर पीट दी। उन्होने बताया कि सभी सीएचसी और पीएचसी के प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जुखाम बुखार से ग्रस्त होने वाले मरीजाें का परीक्षण गंभीरता से किया जाए। कोई असमंजस हो तो उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाए।