Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी का त्योहार नजदीक आते ही घरों में बप्पा के स्वागत की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस बार अगर आप गणपति की सजावट को खूबसूरत होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल भी रखना चाहते हैं, तो पारंपरिक और नेचुरल डेकोरेशन आइडियाज आपके लिए शानदार विकल्प हो सकते हैं। 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी, जबकि अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को होगी।
इस साल इको फ्रेंडली गणपति की सजावट में प्राकृतिक चीज़ों और दोबारा इस्तेमाल होने वाली सामग्री का इस्तेमाल खास आकर्षण बन सकता है। केले और सुपारी के पत्तों से बने बैकड्रॉप, ताजे फूलों की सजावट, मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी चीज़ें और कपड़े की पारंपरिक सजावट घर के मंदिर को खूबसूरत लुक दे सकती हैं। हालिया 2026 डेकोरेशन गाइड्स में भी थर्माकोल और प्लास्टिक की जगह प्राकृतिक तथा दोबारा उपयोग में आने वाले मटेरियल के इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है।
बनाना लीफ बैकड्राॅप रहेगा खास
इस बार गणपति के पीछे केले के पत्तों से बना हरा-भरा बैकड्रॉप एक खूबसूरत और नेचुरल विकल्प हो सकता है। बड़े पत्तों को व्यवस्थित तरीके से लगाकर उनके बीच गेंदे के फूल और आम के पत्तों की लड़ियां लगाई जा सकती हैं। इससे बिना ज्यादा कृत्रिम सजावट के पारंपरिक फेस्टिव लुक तैयार किया जा सकता है।
फूलों से बनाएं नेचुरल माखन
गेंदे, गुलाब, कमल और दूसरे उपलब्ध फूलों से गणपति का माखन सजाया जा सकता है। फूलों को केवल माला की तरह लगाने के बजाय उनसे फ्रेम, तोरण या छोटी फ्लोरल वाॅल बनाई जा सकती है। इससे पूजा वाली जगह में रंग और खुशबू दोनों का खूबसूरत एहसास आएगा।
कपड़े की सजावट फिर आएगी काम
पुरानी साड़ी, दुपट्टे या खूबसूरत कॉटन फैब्रिक को फेंकने की बजाय उससे बैकड्रॉप तैयार किया जा सकता है। लाल, पीले, नारंगी, हरे या सुनहरे रंग के कपड़े को फूलों और वार्म लाइट के साथ सजाने पर पारंपरिक लुक मिल सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि पूजा के बाद कपड़े को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
थर्माकोल की जगह कागज और कार्डबोर्ड
अगर आप DIY डेकोरेशन पसंद करते हैं तो पेपर और कार्डबोर्ड से गणपति के लिए डेकोरेटिव आर्च, मोर, फूल और पारंपरिक मोटिफ्स तैयार किए जा सकते हैं। इससे बच्चों को भी सजावट में शामिल किया जा सकता है। थर्माकोल की जगह रियूजेबल विकल्प चुनना इको फ्रेंडली सेटअप की दिशा में एक आसान कदम हो सकता है।
मिट्टी और नेचुरल एलिमेंट का इस्तेमाल
मिट्टी से बने सजावटी दीए, छोटे गमले और हैंडमेड एलिमेंट्स को सजावट में शामिल किया जा सकता है। इको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियों के लिए भी प्राकृतिक मिट्टी जैसे विकल्पों पर जोर दिया जा रहा है। कुछ शहरों में प्रशासन और स्थानीय संस्थाएं भी भक्तों को मिट्टी की मूर्तियां चुनने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।
फूलों की रंगोली से सजाएं द्वार
रंगों और केमिकल बेस्ड डेकोरेटिव पाउडर्स की जगह फूलों की पंखुड़ियों से रंगोली बनाना एक सुंदर विकल्प हो सकता है। गेंदे और गुलाब की पंखुड़ियों से गणेश प्रतिमा या पारंपरिक पैटर्न बनाया जा सकता है। चाहें तो चावल के आटे और हल्दी जैसी किचन सामग्रियों से भी साधारण नेचुरल रंगोली तैयार की जा सकती है।
ब्रास दीए और रोशनी
बहुत ज्यादा चमकदार आर्टिफिशियल डेकोरेशन के बजाय ब्रास दीए, मिट्टी के दीये और एलईडी लाइट्स का काॅम्बिनेशन पूजा के कोने को एलिगेंट लुक दे सकता है। लाइटिंग को सीधे मूर्ति पर बहुत तेज रखने की बजाय आसपास साॅफ्ट तरीके से लगाने पर फोटो में भी सेटअप ज्यादा सुंदर दिखाई दे सकता है।
पुराने सजावट को दें नया लुक
हर साल नया सजावट का सामान खरीदने की जरूरत नहीं है। पिछले साल के कपड़े, बास्केट, लकड़ी के फ्रेम, फेयरी लाइट्स औऱ आर्टिफिशियल फ्री रियूजेबल एलिमेंट्स को नए तरीके से अरेंज किया जा सकता है। पुराने सामान को थोड़ा माॅडिफाई करके पूरी सजावट को नया रूप दिया जा सकता है।
ईको-फ्रेंडली मूर्ति के साथ पूरी करें थीम
अगर सजावट इको- फ्रेंडली रख रहे हैं, तो मूर्ति और सजावट दोनों में एक ही थीम रखना ज्यादा आकर्षक लगेगा। प्राकृतिक मिट्टी की मूर्ति के साथ फूल, पत्तियां, मिट्टी के दीये और काॅटन फैब्रिक का काॅम्बिनेशन एक पारंपरिक लुक दे सकता है। प्राकृतिक मिट्टी की मूर्तियों को लेकर 2026 में सस्टेनेबेलटी पर खास जोर भी देखने को मिल रहा है।