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Ganesh Utsav 2025: पानीपुरी से लेकर गन्ने तक, सबसे अनोखे इको–फ्रेंडली गणपति देख लोग रह गए हैरान

Thu, 28 Aug 2025 10:41 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Ganesh Utsav 2025: पिछले कुछ वर्षों में इको फ्रेंडली बप्पा की मूर्ति का चलन तेजी से बढ़ा है। मिट्टी, सब्जियों, फलों, गन्ने से लेकर पानी पुरी तक से बने अनोखे गणपति बताते हैं कि त्योहार मनाते हुए भी हम प्रकृति से प्यार कर सकते हैं।
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गणेश जी - फोटो : instagram
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विस्तार
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Ganesh Utsav 2025: भारत में गणेश उत्सव सिर्फ धार्मिक उत्साह का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह संस्कृति, रचनात्मकता और सामाजिक संदेश देने का भी माध्यम है। समय के साथ एक बड़ा बदलाव बप्पा की मूर्तियों के रूप में आया है। पहले जहां प्लास्टर ऑफ पेरिस और रंगीन केमिकल से बनी मूर्तियां जल प्रदूषण और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती थीं, वहीं अब लोग इको–फ्रेंडली बप्पा की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। मिट्टी, सब्जियों, फलों और यहां तक कि पानीपुरी जैसे क्रिएटिव मटीरियल से बने गणपति समाज को भक्ति और प्रकृति के संगम का सुंदर संदेश देते हैं।

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आज के दौर में यह सोच और भी जरूरी हो गई है। ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण की समस्या के बीच, जब हम त्योहारों को हरित रूप में मनाते हैं तो यह आने वाली पीढ़ियों को भी पर्यावरण के प्रति सजग बनाता है। इको–फ्रेंडली गणपति मूर्तियां न सिर्फ सुंदर लगती हैं बल्कि विसर्जन के समय बिना प्रदूषण फैलाए जल में समा जाती हैं। यही है असली भक्ति और धरती मां के प्रति जिम्मेदारी। पिछले कुछ वर्षों में इको फ्रेंडली बप्पा की मूर्ति का चलन तेजी से बढ़ा है। मिट्टी, सब्जियों, फलों, गन्ने से लेकर पानी पुरी तक से बने अनोखे गणपति बताते हैं कि त्योहार मनाते हुए भी हम प्रकृति से प्यार कर सकते हैं।


तरबूज के गणपति

सोशल मीडिया पर तरबूज से बने गणपति जी काफी चर्चा में रहे। तस्वीर सामने आई, जिसमें कई सारे तरबूजों को जोड़कर भव्य गणपति प्रतिमा बनाई गई। इस तरह के गणपति विसर्जन के बाद नदी-तालाबों को दूषित नहीं करते, बल्कि फल की पैदावार को बढ़ावा देते हैं। साथ ही में दिखने में भी बेहद आकर्षक दिखते हैं।  
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केले के फूल और डंठल से बने गणपति

ईको फ्रेंडली गणपति स्थापना के दौरान केले को काफी उपयोग किया जाता है। हरे कच्चे केले से गणपति बनाए गए, तो पिछले वर्षों में केले के डंठल के गणपति, केले के फूल से गणपति बनाएं गए। केले के फूल और डंठल से बनी मूर्तियां परंपरा और प्रकृति दोनों का संगम हैं। दक्षिण भारत में विशेष रूप से इनका चलन देखा जा सकता है।


सब्जियों और नारियल के गणपति

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर खूब वायरल हुई, जिसमें तरह तरह की सब्जियों को मिलाकर गणपति बनाए गए। इसके अलावा नारियल से गणपति की प्रतिमा भी बनाई जा चुकी है। सब्जियों और नारियल से बनी प्रतिमाएं हमें यह संदेश देती हैं कि भगवान वहीं हैं जहां सादगी और प्रकृति है। पूजा के बाद इनका उपयोग प्रसाद या पशु-पक्षियों के भोजन के रूप में किया जा सकता है।


पानीपुरी के गणपति

युवा पीढ़ी की पसंद पानीपुरी से भी गणपति की मूर्तियां बनाई जाती हैं। यह अनोखा विचार सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंड करता है और आकर्षण का केंद्र बनता है।


गन्ना और मसालों से बने गणपति

गन्ने और भारतीय मसालों से बने बप्पा, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माने जाते हैं। इनकी खुशबू और सादगी भक्तों को खास अनुभव देती है। 
 

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