अकेलेपन के कारण तनाव और अवसाद की स्थिति
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असफलता को सफलता में बदलें
डॉ विधि कहती हैं, रिश्ते का टूटना एक तरह का सेंस ऑफ फेलियर होता है। लोग इसे असफलता मानते हैं, इसलिए आपको ज्यादा दुख महसूस होता है। असफलता की भावना को कम करने के लिए कुछ ऐसा करें, जो आपको सेंस ऑफ अकांप्लिशमेंट महसूस कराए, यानी कुछ अच्छा हासिल करने की कोशिश करें। अपनी प्रतिभा और रुचि को पहचानें। कॉलेज या वर्क प्लेस पर कुछ अच्छा करने की कोशिश करें। कई लोग ब्रेकअप के बाद फिजिकल फिटनेस पर ध्यान देना शुरू कर देते हैं। जब उनकी बाॅडी एक अच्छे शेप में आ जाती हैं, तो उनमें सेंस ऑफ अकांप्लिशमेंट आ जाता है। रिश्ते की असफलता की वजह से होने वाली तकलीफ को कुछ अच्छा करके कम करने की कोशिश कर सकते हैं।
ब्रेकअप के बाद अकेलेपन से बचें
डाॅ विधि के मुताबिक, अगर आपको लगने लगता है कि किसी से बात करने का मन नहीं है। सामाजिक तौर पर लोगों से आपकी दूरी बढ़ रही है तो किसी काउंसलर से पास जाएं या किसी मनोचिकित्सक से मिलें। वह आपको बताएंगे कि कैसे आपको अपनी एक्टिविटी को वापस से ठीक करके अपने आपको सक्रिय बनाना है, ताकि आप अपने समय का सही से उपयोग कर पाएं और अनिद्रा या अवसाद की स्थिति से बाहर निकाल पाएं।
खुद को चोट न पहुचाएं
अक्सर रिलेशनशिप ब्रेकडाउन के कारण लोग खुद को चोट पहुंचाने लगते हैं। खाना-पीना छोड़ देते हैं, आत्महत्या करने के बारे में सोचते हैं। अल्कोहल व नशे की ओर चले जाते हैं। 22 वर्षीय एक लड़की ने ब्रेकअप के बाद पार्लर जाकर अपने लंबे बालों को पूरी तरह से कटवाकर मुंडन करवा लिया। लड़की से इसकी वजह पूछी गई, तो बताया कि उसके एक्स पार्टनर को लंबे बाल पसंद थे।
मनोचिकित्सक कहते हैं कि रिश्ता कितने वक्त तक चलेगा, इसका पहले से पता नहीं होता। लेकिन अगर रिश्ता टूट जाता है तो जीवन वहीं पर खत्म नहीं होता। इस बात को लोगों को समझना होगा। सबसे जरूरी है नकारात्मक क्रियाओं से बचना होगा। खुद को चोट पहुंचाना, एल्कोहल या ऐसी क्रिया जिससे उन्हें दुख पहुंचता है, उसे करने से बचना होगा। ऐसी स्थिति में बदला लेने की भावना से कोई कदम न उठाएं।
सबसे पहले जरूरी है कि दिमाग में चल रही नकारात्मक बातों या क्रिया को नजरअंदाज करके सकारात्मक बातें सोचें। यह सोचें कि मुझे कैसे बेहतर बनना है, या ऐसे अच्छे काम करें, जिससे आपके एक्स पार्टनर को महसूस हो कि आपको छोड़कर उन्होंने गलती की है।
मानसिक स्वास्थ्य और हृदय रोगों का संबंध
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रिश्ता खत्म होने के बाद लोग अपने पार्टनर को असफल रिश्ते के लिए जिम्मेदार मानते हैं। आपको ये जानना चाहिए कि कहीं आप इस रिश्ते में टॉक्सिक तो नहीं थे। हो सकता है कि आपकी कमियों के कारण ही आपका रिश्ता न चल सका हो। इस बात को समझने के बाद अपनी कमियों पर काम करने की कोशिश करें।
मानसिक विकार का हृदय स्वास्थ्य पर असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मानसिक विकारों के कारण कई प्रकार की शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। जब व्यक्ति बहुत अधिक तनाव में होता है तो उच्च रक्तचाप की समस्या और हृदय रोगों का खतरा बढ़ने की संभावना हो जाती है। रिलेशनशिप मेंटल हेल्थ को प्रभावित करता है और मानसिक स्थिति में गड़बड़ी ह्रदय पर असर डालती है। डॉ विधि कहती हैं कि दिल टूटने या भावनात्मक कमजोरी के कारण लंबे समय तक तनाव में रहने से काॅटिशाॅल निकलता है। यह काॅटिशाॅल हमारे ह्रदय की आर्टीज और वेंस में जाकर कोलेस्ट्रॉल के रूप में जमा हो जाता है। कोलेस्ट्रॉल के वेंस में जमा होने के कारण हृदय रोग संबंधी समस्या होती है। इसलिए भी हमें मानसिक सेहत का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। सिर्फ हृदय ही नहीं, मानसिक विकार के कारण हार्मोनल दिक्कतें भी हो सकती हैं। लंबे समय तक तनाव में रहने से लोगों को हाइपोथायरायडिज्म हो जाता है।
एक कहावत है, 'अच्छा मस्तिष्क एक स्वस्थ शरीर के अंदर ही रह सकता है।' बहुत जरूरी है कि मानसिक स्वास्थ्य को बनाएं रखने के लिए फिटनेस, हृदय और पूरे शरीर की सेहत का ध्यान रखा जाए। इसके लिए सकारात्मक सोच, शारीरिक सक्रियता और खुद को व्यस्त रखें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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