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World Malaria Day: देश का ये राज्य हो गया मलेरिया फ्री! दिल्ली-एनसीआर में कैसे हैं हालात? यहां जानिए सबकुछ

Fri, 25 Apr 2025 07:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है भारत में गोवा राज्य मलेरिया के उन्मूलन के चरण में है। गोवा में 2008 में मलेरिया के 9,822 मामले और 21 मौतें दर्ज की गईं थी। 2018 से यहां मलेरिया से कोई मौत नहीं हुई है।
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मलेरिया और इसका खतरा - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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मच्छर जनित कई प्रकार की बीमारियों के कारण हर साल स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा बोझ देखा जाता रहा है। भारत में भी मानसून के दिनों (जून-अक्तूबर) में डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी कई प्रकार की गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

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मलेरिया की बीमारी स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का कारण रही है, इससे हर साल हजारों लोगों की मौत होती है। भारत ने अपने बहुतस्तरीय प्रयासों की मदद से पिछले एक दशक में मलेरिया के मामलों और इससे मृत्यदर में कमी लाई है, हालांकि चुनौती अब भी बहुत बड़ी है।

मलेरिया के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने और इस बीमारी को नियंत्रित करने के प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए हर साल 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक साइमा वाजेद ने कहा, भारत ने साल 2015 से मलेरिया की घटनाओं में 63% से अधिक की कमी हासिल की है, यह निश्चित ही बहुत सराहनीय है।

आइए जानते हैं कि भारत के विभिन्न राज्यों में मलेरिया के मामलों को रोकने के लिए क्या प्रयास किए गए और इसमें कितनी सफलता हासिल हुई है। 

मलेरिया मुक्त होने की कगार पर गोवा - फोटो : Freepik.com
गोवा मलेरिया मुक्त होने के बिल्कुल करीब

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है भारत में गोवा राज्य मलेरिया के उन्मूलन के चरण में है। गोवा में 2008 में मलेरिया के 9,822 मामले और 21 मौतें दर्ज की गईं थी लेकिन अब राज्य इस बीमारी के उन्मूलन के चरण में है। राज्य ने सूचना दी है कि साल 2018 से यहां मलेरिया से कोई मौत नहीं हुई है, इसके अलावा 2023 से स्वदेशी आबादी के बीच मलेरिया के कोई मामले भी सामने नहीं आए हैं। 

स्वास्थ्य सेवाओं की उप निदेशक डॉ. कल्पना महात्मे ने कहा, हमने सभी दस्तावेज जमा कर दिए हैं और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारियों ने निरीक्षण किया है। मलेरिया उन्मूलन के लिए हम बस प्रमाण पत्र मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

दिल्ली-एनसीआर में मलेरिया - फोटो : Freepik.com
दिल्ली-एनसीआर में मलेरिया के मामले

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में मलेरिया के मामलों की बात करें तो पता चलता है कि यहां कुल मामलों में से 71 प्रतिशत मरीज शहरी क्षेत्रों से हैं, इसलिए स्वास्थ्य विभाग की शहरी क्षेत्रों पर विशेष नजर है। पिछले चार वर्षों की तुलना में वर्ष 2024 में सबसे ज्यादा मलेरिया के मामले दर्ज किए गए हैं। 

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष कुल 148 लोगों में मलेरिया की पुष्टि हुई थी, जिनमें से 106 मामले केवल बिसरख ब्लॉक से थे बिसरख ब्लॉक में अधिकतर शहरी क्षेत्र आते हैं, जिनमें हाईराइज सोसायटीज, सेक्टर और शहरी गांव शामिल हैं। यह क्षेत्र अन्य ब्लॉकों की तुलना में अधिक विकसित माना जाता है। 

मलेरिया अधिकारी श्रुति कीर्ति वर्मा ने बताया कि बिसरख ब्लॉक में पिछले साल सबसे अधिक मामले सामने आए थे। तीन मामलों में मलेरिया फाल्सीपेरम की पुष्टि हुई थी, जो मलेरिया का सबसे गंभीर प्रकार होता है।

पिछले चार वर्षों के आंकड़ें इस प्रकार हैं।
 
वर्ष मलेरिया के कुल मामले
2021 117
2022  104
2023  45
2024  148

 
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दुनियाभर में कैसे हैं हालात - फोटो : Freepik.com
दुनियाभर में मलेरिया की क्या स्थिति है?

हाल ही में डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक साइमा वाजेद ने कहा, वैश्विक स्तर पर मलेरिया की रोकथाम को लेकर हमें व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है। हमारे क्षेत्र ने मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में उत्कृष्ट प्रगति की है। दक्षिण-पूर्व एशिया एकमात्र ऐसा डब्ल्यूएचओ का क्षेत्र है जिसने मलेरिया के मामलों और मौतों को कम करने के लिए प्रयासों में विशेषज्ञ सफलता पाई है। 

मालदीव और श्रीलंका मलेरिया मुक्त हो गए हैं, ये हमारे लिए गर्व की बात है। इसके अलावा नौ एंडेमिक देशों में से चार- भूटान, भारत, नेपाल और तिमोर-लेस्ते ने 2015 से मलेरिया की घटनाओं में 63% से अधिक की कमी हासिल की है। तिमोर-लेस्ते और भूटान भी मलेरिया उन्मूलन के निकट हैं।

इसके अलावा दुनियाभर में 22 अक्तूबर, 2024 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कुल 44 देशों और एक टेरिटरी को मलेरिया मुक्त प्रमाणित किया गया है। इसमें हाल ही में शामिल हुए अजरबैजान, ताजिकिस्तान और मिस्र जैसे देश शामिल हुए हैं।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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