आंखों की जा चुकी रोशनी कैसे वापस आई?
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पहले पूरा मामला जान लीजिए
ये मामला इटली का है। 67 वर्षीय महिला एलेना एक गंभीर कार दुर्घटना के बाद पूरी तरह से अपनी आंखों की रोशनी खो चुकी थीं। हादसे में उनकी बाईं आंख की ऑप्टिक नर्व (दृष्टि तंत्रिका) बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके कारण उनकी बाईं आंख से दिमाग तक रोशनी का संदेश पहुंचना बंद हो गया और वह देख नहीं पा रही थीं।
हैरानी की बात यह थी कि उनकी बाईं आंख के बाकी हिस्से पूरी तरह सुरक्षित थे, लेकिन ऑप्टिक नर्व के खराब होने के कारण आंख काम नहीं कर रही थी।
दाईं आंख में पहले से ही मैक्यूलर डिजनरेशन की समस्या थी। यह उम्र बढ़ने के साथ होने वाली आंख की बीमारी है, जिसमें आंख के उस हिस्से को नुकसान पहुंचता है जो साफ और बारीक चीजें देखने में मदद करता है। कार दुर्घटना के दौरान उनकी दाईं आंख में भी गंभीर चोट लगी और उनकी रेटिना और कॉर्निया को नुकसान पहुंचा।
- रेटिना आंख के अंदर मौजूद वह संवेदनशील परत है जो रोशनी को तंत्रिका संकेतों में बदलती है और फिर इन संकेतों को ऑप्टिक नर्व के जरिए दिमाग तक भेजती है।
- कॉर्निया आंख की सबसे बाहरी पारदर्शी परत होती है, जो रोशनी को आंख के अंदर सही तरीके से फोकस करने में मदद करती है।
आंखों की अपनी तरह की पहली सर्जरी
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डॉक्टरों ने की अनोखी सर्जरी
स्थानीय रिपोर्ट्स से पता चलता है कि आंखों की इस समस्या को ठीक कराने के लिए एलेना कई डॉक्टरों से मिलीं, कई जांच कराया। पर चूंकि उन्हें पहले से मैक्यूलर डिजनरेशन की भी समस्या थी, ऐसे में ज्यादातर डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए।
एक्सीडेंट के कारण आंख को हुए इस गंभीर नुकसान के कारण सामान्य स्थिति में किया जाने वाला कॉर्निया ट्रांसप्लांट यानी किसी दूसरे व्यक्ति से स्वस्थ कॉर्निया लगाना भी संभव नहीं था। नतीजा यह हुआ कि एलेना पांच साल से ज्यादा समय तक अपनी दोनों आंखों से पूरी तरह नहीं देख सकीं। आलम ये था कि दिखाई न देने के कारण उन्हें अपने रोजाना के काम करने के लिए भी दूसरों की मदद लेनी पड़ती थी।
लेकिन इसके बाद डॉक्टरों ने ऐसा कदम उठाया, जिसे दुनिया में पहली बार किया गया।
इटली के ट्यूरिन स्थित मोलिनेट हॉस्पिटल की यूनिवर्सिटी आई क्लिनिक के सर्जनों ने एलेना की बाईं आंख से स्वस्थ हिस्से को निकालकर उनकी दाईं आंख में ट्रांसप्लांट कर दिया। बाईं आंख के स्वस्थ हिस्से ने उनकी दाईं आंख की खराब संरचनाओं को सुधारने में मदद की।
लौट आई आंखों की जा चुकी रोशनी
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कॉर्निया सहित कई हिस्से किए गए ट्रांसप्लांट
प्रोफेसर मिशेल रीबाल्डी के नेतृत्व में की गई इस सर्जरी में सिर्फ कॉर्निया ही नहीं, बल्कि स्क्लेरा, कंजंक्टाइवा और पहली बार आंख की रेटिना के बीच के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से मैक्युला को भी दूसरी आंख में ट्रांसप्लांट कर दिया गया।
- स्क्लेरा आंख की सफेद और मजबूत बाहरी परत होती है। यह आंख के आकार को बनाए रखने और आंख की मांसपेशियों को उसे घुमाने में मदद करती है।
- कंजंक्टाइवा आंख की सतह को ढकने वाली पतली झिल्ली होती है। यह आंख को नम रखने और धूल-मिट्टी जैसी बाहरी चीजों से बचाने में मदद करती है।
- मैक्युला रेटिना के बीच का वह बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां से हमें सबसे साफ और बारीक दिखाई देता है। किताब पढ़ने, चेहरे पहचानने, छोटी चीजों को स्पष्ट देखने और गाड़ी चलाने जैसी गतिविधियों के लिए मैक्युला ही मदद करती है।
डॉक्टरों ने बताया कि ये दुनिया की पहली ऐसी सर्जरी है जिसमें आंख से स्वस्थ ऊतक लेकर उसे उनकी दाईं आंख में लगाया। इससे दो काफी हद तक खराब आंखों के बीच,एक ऐसी आंख तैयार हो गई जिससे उन्हें फिर से दिखाई देने लगा।
प्रोफेसर रीबाल्डी कहते हैं, इस सर्जरी के शुरुआती नतीजे काफी उत्साह बढ़ाने वाले हैं। यह प्रक्रिया आंखों की सर्जरी के क्षेत्र में एक नई दिशा खोल सकती है। इससे पहले आंख की रेटिना के बीच वाले हिस्से को दूसरी जगह प्रत्यारोपित करना संभव नहीं था। अब डॉक्टरों की टीम यह देख रही है कि ट्रांसप्लांटेड रेटिना समय के साथ कितनी अच्छी तरह से काम करती है?
मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरी मेहनत का सबसे भावुक और खास पल तब आया, जब एलेना ने ऑपरेशन के बाद दोबारा आंखें खोलीं और अपने बेटे का चेहरा पहचान लिया। ऑपरेशन के बाद एलेना की स्थिति लगातार अच्छी बनी हुई है। बार-बार की गई जांचों में भी यह पुष्टि हुई है कि ट्रांसप्लांट सफल रहा है और उनकी दाईं आंख धीरे-धीरे काम करने की क्षमता विकसित कर रही है।
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स्रोत:
Autotrapianto della retina centrale, intervento eseguito per la prima volta al mondo alle Molinette
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