आईसीएमआर
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स्वास्थ्य विशेषज्ञ और इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ बायोएथिक्स के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर अनंत भान भी आईसीएमआर की योजना पर हैरानी जताते हैं। वो कहते हैं, 'वैक्सीन को क्लीनिकल ट्रायल के लिए सात जुलाई तक रजिस्टर किया जा सकता है, अगर इसने अभी तक प्री-क्लीनिकल ट्रायल डेवेलपमेंटल स्टेज को पूरा नहीं किया है। यह वैक्सीन बाजार में 15 अगस्त तक कैसे लॉन्च की जा सकती है? क्या एक महीने से भी कम वक्त में वैक्सीन से जुड़े टेस्ट पूरे किए जा सकते हैं? क्या उन्होंने पहले से ही वैक्सीन की गुणवत्ता के बारे में राय बना रखी है?'
वो और सवाल करते हुए कहते हैं, 'वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल के लिए जिन संस्थानों को चुना गया था, उनका आधार क्या था? क्या ये अस्पताल इन टेस्टों के लिए उपयुक्त हैं और किस लिस्ट में से उन 12 संस्थानों को चुना गया? इन अस्पतालों को आईसीएमआर ने चुना या भारत बायोटेक कंपनी ने? कोरोना एक महामारी है। इसको ध्यान में रखते हुए क्या इन अस्पतालों का चुना जाना सही है?'
वो आगे कहते हैं, 'आईसीएमआर ने दो जुलाई को खत लिखा है और उन संस्थानों को सात जुलाई तक सारी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कहा गया है, इसका मतलब है सिर्फ पांच दिनों में। क्या पांच दिनों में लोग टेस्ट के लिए तैयार हो जाएंगे? क्या एथिक्स कमेटी इसकी इजाजत देगी?'