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Winter Health: ठंड बढ़ते ही क्यों बढ़ जाती है कब्ज की दिक्कत? जानिए पाचन दुरुस्त रखने के जरूरी टिप्स

Thu, 01 Jan 2026 08:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • सर्दियों में ठंड के कारण लोग शारीरिक गतिविधि कम कर देते हैं। नियमित व्यायाम न करने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। गतिविधि कम होने के कारण आंतों की गति सुस्त हो जाती है, जिससे भोजन ठीक से पच नहीं पाता और कब्ज की समस्या बढ़ जाती है।
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सर्दियों में कब्ज की समस्या - फोटो : Freepik.com
सर्दियों का मौसम हमारी सेहत के लिए कई तरह की चुनौतियां लेकर आता है। दिल के मरीजों के लिए तो ये चुनौतीपूर्ण है ही साथ ही तापमान गिरने के साथ पाचन की दिक्कतें भी बढ़ने लग जाती हैं। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि किस तरह सर्दियों में हार्ट अटैक होने का जोखिम बढ़ जाता है। अब हम जानेंगे कि ठंड के दिनों में पाचन से संबंधित समस्याएं क्यों बढ़ जाती हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड के मौसम में शरीर की कार्यप्रणाली में कुछ बदलाव आते हैं, जिसका सीधा असर पाचन तंत्र पर पड़ता है। तापमान गिरने के साथ हमारी लाइफस्टाइल और खानपान की आदतें बदल जाती हैं, जो पाचन को प्रभावित करती हैं। इसके अलावा सर्दियों में  मेटाबॉलिज्म भी धीमा हो जाता है, जिसके कारण पेट से संबंधित समस्याओं का खतरा हो सकता है।

आइए जानते हैं कि ऐसे में पाचन को ठीक रखने के लिए क्या तरीके अपनाए जा सकते हैं?
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पाचन तंत्र की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
सर्दियों में पाचन की समस्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सर्दियों में पाचन की समस्या बढ़ने के पीछे शारीरिक गतिविधि की कमी, पानी कम पीने, भारी भोजन और लाइफस्टाइल में बदलाव प्रमुख हैं। सही खानपान, पर्याप्त पानी, नियमित व्यायाम और संतुलित दिनचर्या अपनाकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। 

बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को इस मौसम में पाचन को ठीक रखने के लिए जरूरी उपाय करते रहने चाहिए। आइए जानते हैं कि सर्दियों में पेट की दिक्कतों को दूर करने के लिए कौन से तरीके मददगार हो सकते हैं?
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गरम पानी पीने के लाभ - फोटो : Adobe Stock
गुनगुना पानी पीने से मिलता है आराम

सर्दियों में प्यास कम लगती है, जिससे लोग कम पानी पीते हैं। शरीर में पानी की कमी कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं की बड़ी वजह बनती है। पानी भोजन को तोड़ने और पोषक तत्वों को शरीर में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है। गुनगुना पानी पीने से पाचन तंत्र की मांसपेशियों को आराम मिलता है और आंतों की गतिविधि बेहतर होती है।

गुनगुना पानी गैस, एसिडिटी और पेट फूलने की समस्या को कम करता है।

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पाचन कैसे सुधारें? - फोटो : Freepik.com
शारीरिक गतिविधियां बढ़ाएं

ठंड के कारण लोगों की शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं जिसका सीधा असर पाचन पर पड़ता है। शारीरिक गतिविधि की कमी से आंतों की गति धीमी हो जाती है, जिससे कब्ज और गैस की समस्या बढ़ती है। रोजाना 30 मिनट के व्यायाम की आदत पाचन तंत्र को ठीक रखती है। नियमित योगासन पेट की मांसपेशियों को मजबूत करते हैं और पाचन में सुधार लाते हैं।

नियमित शारीरिक गतिविधि ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करती है, जिससे पाचन ठीक रहता है।
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फाइबर वाली चीजों का करिए सेवन - फोटो : Freepik.com
फाइबर वाली चीजें खाएं

पाचन को ठीक रखने के लिए फाइबर बेहद जरूरी होता है। आहार विशेषज्ञों के अनुसार, फाइबर की कमी से कब्ज की समस्या बढ़ जाती है। फाइबर मल त्याग को आसान बनाता है। गाजर, पालक, चुकंदर, शकरकंद, ओट्स और साबुत अनाज सर्दियों के बेहतरीन फाइबर स्रोत हैं। फाइबर आंतों में मौजूद गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है, जो पाचन और इम्युनिटी दोनों के लिए जरूरी हैं। 


सही समय पर भोजन करें

अनियमित समय पर खाना पाचन तंत्र की दिक्कतें बढ़ा देता है। सर्दियों में लोग भारी और तला-भुना खाना ज्यादा खा लेते हैं, जिससे पेट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। रोजाना एक ही समय पर भोजन करने से शरीर पहले से पाचन एंजाइम्स तैयार कर लेता है, जिससे खाना आसानी से पचता है। सर्दियों में ज्यादा खाने से भी बचना चाहिए।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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