- यह खून में मौजूद एक तरह का कण होता है, जिसका स्तर हमारे जीन से तय होता है। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इसका स्तर बढ़ा होने पर भी आमतौर पर कोई लक्षण नहीं दिखते।
- 2026 की नई गाइडलाइन में एलपी-ए को हृदय रोग के लिए महत्वपूर्ण जोखिम कारक के तौर पर शामिल किया गया है।
- स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब हर वयस्क को जीवन में कम से कम एक बार इसकी जांच कराने की सलाह दी गई है। एक बार की जांच को ही पर्याप्त माना जाता है।
एलपी-ए बढ़ा होने पर यह धमनियों में प्लाक का जमाव बढ़ाने लगता है। इसके साथ सूजन और खून के थक्के बनने की प्रक्रिया भी बढ़ सकती है। लंबे समय में यह धमनियों को संकरा कर सकता है जिससे हृदय और मस्तिष्क तक खून पहुंचने में रुकावट आ सकती हैं। इससे हार्ट अटैक होने का जोखिम बढ़ जाता है।
इसका स्तर पूरी तरह से आनुवंशिक (जींस) पर निर्भर होता है, जो माता-पिता से बच्चों में आता है। चिंता की बात ये भी है कि खान-पान, वजन या व्यायाम करने से भी इसके स्तर पर कोई खास असर नहीं पड़ता है।
मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक लिपोप्रोटीन-ए टेस्ट की नॉर्मल रेंज आमतौर पर 30 मिलीग्राम/डीएल या 75 नैनोमोल्स/लीटर (nmol/L) से कम माना जाता है। 30 मिलीग्राम/डीएल से अधिक होना आपके लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला माना जाता है।
एलपी-ए से हृदय रोगों का खतरा
- फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं हृदय रोग विशेषज्ञ?
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ एम.आर खान बताते हैं, एलपी-ए एक साइलेंट समस्या है, जो लाखों लोगों के शरीर में मौजूद हो सकती है और लंबे समय तक बिना किसी संकेत के छिपी रहती है। हैरानी की बात यह है कि बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं। लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में इसकी जांच शामिल नहीं होती है, इसलिए कई लोगों को कभी पता ही नहीं चल पाता कि उनका एलपी-ए बढ़ा हुआ है।
इसलिए ऐसा जरूरी नहीं है कि जिस व्यक्ति का एलपी-ए ज्यादा है, वह मोटा या अस्वस्थ दिखता हो या उसकी जीवनशैली खराब हो। स्वस्थ-फिट दिखाई देने के बावजूद लोगों में इसका स्तर हाई हो सकता है। अक्सर लोगों में एलपी-ए का स्तर ज्यादा होने का पता तब चलता है, जब उन्हें अचानक हार्ट अटैक या स्ट्रोक हो जाता है।
दिखने में फिट-फिर भी खतरा
अमेरिका के मशहूर पर्सनल ट्रेनर इसका बड़ा उदाहरण हैं। 51 साल की उम्र में वे काफी फिट और स्वस्थ दिखते थे। लेकिन व्यायाम करते समय उन्हें अचानक ऐसा हार्ट अटैक आया।
- हार्पर ने बाद में एक इंटरव्यूमें बताया था कि उस समय डॉक्टरों ने उनके बचने की संभावना केवल छह प्रतिशत बताई थी।
- उनका दिल धड़कना बंद हो गया था, वे जमीन पर पड़े थे।
- बाद में हार्पर को पता चला कि उनके हार्ट अटैक के पीछे शरीर में बढ़ा हुआ एलपी-ए कारण था, जो उन्हें परिवार से मिला था।
- उनकी मां और नाना, दोनों की मौत भी कम उम्र में हार्ट अटैक के कारण हुई थी।
एलपी-ए क्या है और शरीर में इसका क्या काम है?
एलपी-ए एक ऐसा कण होता है, जो खून के जरिए कोलेस्ट्रॉल को शरीर में ले जाने का काम करता है। इसे मुख्य रूप से लिवर में बनता है।
ऑरलैंडो हेल्थ हार्ट एंड वैस्कुलर इंस्टीट्यूट में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रयान स्मिथ कहते हैं, शरीर में एलपी-ए की कुछ सामान्य भूमिकाएं भी हो सकती हैं। यह घाव भरने और संक्रमण से लड़ने की प्रक्रिया में मदद करता है। समस्या तब पैदा होती है, जब इसका स्तर बहुत ज्यादा हो जाए।
- एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल की तरह ही एलपी-ए भी धमनियों की अंदरूनी दीवारों में जमा होकर प्लाक बना सकता है।
- इससे खून का संचार धीरे-धीरे कम होने लगता है। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
- एलपी-ए खून के जमाव को बढ़ाने वाला भी पाया गया है, इससे खून के थक्के बनने का खतरा बढ़ता है और हृदय तथा मस्तिष्क तक खून पहुंचने में रुकावट पैदा हो सकती है।
इसमें सुधार करना भी खुद से आसान नहीं
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि एलपी-ए का स्तर मुख्य रूप से जीन से तय होता है, इसलिए खान-पान या व्यायाम से इसका स्तर बहुत ज्यादा बदलना आसान नहीं है।
हालांकि कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि शराब कम करना, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के साथ ब्लड शुगर जैसे दूसरे जोखिमों को कंट्रोल करना आपके जोखिमों को कम करने में मदद कर सकती है। ये सभी स्थितियां पहले से संकरी हो रही धमनियों पर अतिरिक्त दबाव डाल रही होती हैं।
अब सवाल ये है कि फिर आप अपने जोखिमों को कैसे जान सकते हैं?
कैसे पता चलेगा कि एलपी- ए बढ़ा हुआ है?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि एलपी-ए का स्तर जानने के लिए खून की जांच कराना एक अच्छा तरीका माना जाता है।
- डॉ खान कहते हैं, जिन लोगों को कम उम्र में हार्ट अटैक या स्ट्रोक हो चुका है या कम उम्र में हृदय की नसों से जुड़ी बीमारी हुई है, उन्हें यह जांच कराने की सलाह दी जाता है।
- इसके अलावा यदि परिवार में पहले से किसी को कम उम्र में हार्ट अटैक या हृदय रोग की हिस्ट्री रही हो, पैरों में खून का प्रवाह कम हो, परिवार में किसी को हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या या दिल के एक वाल्व के संकुचित होने की स्थिति रही हो तो भी डॉक्टर एलपी-ए की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
- अध्ययनों में पाया गया है कि एलपी-ए जितना ज्यादा होगा, हृदय संबंधी बीमारी का खतरा उतना ही बढ़ सकता है। बहुत ज्यादा स्तर होने पर हृदय रोग का खतरा दोगुने से भी अधिक हो सकता है।
डॉक्टर कहते हैं, फिलहाल एलपी-ए को कम करने के लिए कोई ऐसी दवा उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर कुछ दवाएं दे सकते हैं जो आपके जोखिमों को कम करने में मददगार हो सकती हैं। कई ऐसी नई दवाओं पर परीक्षण चल रहे हैं, जिन्हें खास तौर पर एलपी-ए को कम करने के लिए विकसित किया जा रहा है। ये दवाएं लिवर को एलपी-ए बनाने से रोकने की कोशिश करती हैं।
--------------
स्रोत:
American Heart Association lipoprotein(a) discovery project: A national initiative to advance awareness and lipoprotein(a) testing for patients with cardiovascular disease
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।