डायबिटीज में इंसुलिन का इजेक्शन
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एक इंजेक्शन से रहेगा शुगर कंट्रोल
हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हफ्ते में बस एक बार लगाए जाने वाले इस इंसुलिन इजेक्शन को अधिकारियों से मंजूरी मिल गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ये इंसुलिन लंबे समय तक असर बनाए रखने वाला रूप है, जो शरीर में जरूरी इंसुलिन की कमी को पूरा करने में मदद करता है।
इंसुलिन वह हार्मोन है जो खाने से मिलने वाली शुगर को शरीर के लिए ऊर्जा में बदलने में मदद करता है। जिन लोगों में इसकी दिक्कत होती है, उनमें ग्लूकोज का उर्जा के रूप में सही से इस्तेमाल नहीं हो पाता और खून में इसकी मात्रा बढ़ने लग जाती है।
- नए इंजेक्शन पर हुए परीक्षणों में पाया गया कि यह शरीर में इंसुलिन के स्तर और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में रोजाना लगाए जाने वाले इंसुलिन इंजेक्शन जितना ही प्रभावी हो सकता है।
- टाइप-2 डायबिटीज वाले करीब हर चार में से एक व्यक्ति को इंसुलिन इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है।
- कुछ लोगों को तो ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के लिए दिन में कई बार इंसुलिन लेना पड़ता है।
- ऐसे लोगों के लिए इंसुलिन एफ्सिटोरा अल्फा एक बड़ा बदलाव ला सकता है।
गौरतलब है कि इससे पहले अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने 'अविक्ली' इंजेक्शन के बारे में जानकारी दी थी। दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में दुनिया का पहला लॉन्ग-एक्टिंग साप्ताहिक इंसुलिन लॉन्च किया था।
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डायबिटीज रोगियों के लिए इंजेक्शन
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एफ्सिटोरा अल्फा इंजेक्शन करेगी बड़ा कमाल
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एफ्सिटोरा अल्फा को ऑन्सविक नाम से भी जाना जाता है और इसे दवा कंपनी एली लिली नाम की कंपनी ने बनाया है। इससे उन लोगों को काफी आराम मिल सकता है जिन्हें रोजाना खुद से इंसुलिन का इंजेक्शन लगाने में परेशानी होती है। कमजोर या बुजुर्ग लोग, कम दिखाई देने वाले, हाथों की समस्याओं के शिकार और डिमेंशिया-पार्किंसंस के शिकार डायबिटीज रोगियों के लिए ये वरदान साबित हो सकती है।
- ब्रिटेन की नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर एक्सीलेंस (एनआईसीई) ने इस इंजेक्शन को पैसे के लिहाज से भी किफायती और अच्छा विकल्प माना है। हालांकि, ब्रिटेन की सरकारी स्वास्थ्य सेवा ने अभी पूरे देश में इसे उपलब्ध कराने की योजना की घोषणा नहीं की है।
एनआईसीई में दवाओं के मूल्यांकन की निदेशक हेलेन नाइट कहती हैं, रोजाना इंसुलिन इंजेक्शन लेने के बजाय सप्ताह में केवल एक बार इंजेक्शन लेना डायबिटीज वालों की रोजमर्रा की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकता है। खासतौर पर उन लोगों के लिए जिन्हें इंसुलिन लगाने में परिवार के सदस्य या स्वास्थ्यकर्मी की मदद लेनी पड़ती है।
डायबिटीज रोगियों के लिए खुशखबरी
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बढ़ते डायबिटीज को लेकर विशेषज्ञ चिंतित
दूसरी ओर दुनियाभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ युवाओं में तेजी से बढ़ते टाइप 2 डायबिटीज को लेकर काफी चिंतित हैं। इंपीरियल कॉलेज लंदन में अध्ययनकर्ताओं ने बढ़ते डायबिटीज के मामलों के लिए लोगों में बढ़ते मोटापे और बेली फैट को सबसे ज्यादा जिम्मेदार ठहराया है।
रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि 2011 के बाद से 30 साल से कम उम्र की महिलाओं में यह समस्या किसी भी अन्य समूह की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ी है। जिन लोगों का शुगर लेवल दवाओं से कंट्रोल नही रहता उन्हें डॉक्टर इंसुलिन लेने की सलाह दे सकते हैं।
- इसके अलावा टाइप-1 डायबिटीज वाले मरीजों को जीवनभर इंसुलिन लेते रहने की जरूरत हो सकती है।
- दुनिया भर में अनुमानित 95 लाख लोग टाइप-1 डायबिटीज का शिकार हैं, जिन्हें रोजाना और जीवनभर इंसुलिन थेरेपी की जरूरत होती है।
- ऐसे मरीजों के लिए भी एफ्सिटोरा अल्फा को काफी कारगर माना जा रहा है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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