बढ़ता पारा बढ़ा रहा है दिक्कतें
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इस साल की फरवरी भी थी काफी गर्म
इससे पहले यूरोपियन कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (सी3एस) ने एक रिपोर्ट में बताया था कि इस साल फरवरी का महीना 125 साल में अब तक का तीसरा सबसे गर्म फरवरी था। इस दौरान सतह के पास तापमान 1850 से 1900 की तुलना में 1.59 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया।
विशेषज्ञ कहते हैं, जलवायु परिवर्तन की वजह से वैश्विक तापमान में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है, इससे गंभीर बीमारियों के बढ़ने का भी खतरा हो सकता है जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।
अब अप्रैल में गर्मी के कई सारे रिकॉर्ड्स तोड़ रही है।
हीटस्ट्रोक का बढ़ रहा है खतरा
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महाराष्ट्र में 10 मार्च अप्रैल के दौरान 70 से अधिक हीट स्ट्रोक के मामले
बढ़ती गर्मी और इसके कारण हीट स्ट्रोक के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अकेले महाराष्ट्र में मार्च-अप्रैल के दौरान हीट स्ट्रोक के 70 से अधिक मामले रिपोर्ट किए गए। हीट स्ट्रोक के कारण संभावित तीन मौतें भी देखी गई हैं।
राजधानी दिल्ली के अस्पतालों से मिल रही जानकारियों के मुताबिक यहां रोजाना 20-30 मरीज गर्मी और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत के साथ आ रहे हैं। ज्यादातर लोगों को तेज बुखार, पेट दर्द, नाड़ी तेज चलने, सांस की तकलीफ और हार्ट रेट बढ़ने की दिक्कतें हो रही हैं।
गर्मी के कारण होने वाली समस्याएं
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क्रॉनिक बीमारियों के शिकार लोगों को लिए बढ़ सकती हैं दिक्कतें
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बढ़ती गर्मी पर्यावरण के लिए तो चुनौतीपूर्ण है ही साथ ही इसका सेहत पर भी कई प्रकार से नकारात्मक असर हो सकता है। विशेषतौर पर जिन लोगों को पहले से क्रॉनिक बीमारियों की समस्या- जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय संबंधित दिक्कतें रही हैं उनके लिए इस तरह का मौसम गंभीर समस्याओं को बढ़ाने वाला हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गर्म मौसम और हीटवेव किसी को भी प्रभावित कर सकता है, इसके कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
- जैसे-जैसे आपका शरीर बढ़ते तापमान के कारण गर्म होता जाता है, आपकी रक्त वाहिकाएं फैलने लगती हैं, जिससे रक्तचाप कम हो जाता है।
- इसके कारण आपके दिल को पूरे शरीर में रक्त का संचार करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
- ये मौसम हृदय के मरीजों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- इन महीनों में बरती गई थोड़ी भी लापरवाही आपके स्वास्थ्य के लिए दिक्कतें बढ़ाने वाली हो सकती है।
गर्मी से होने वाली बीमारियों में चक्कर आना, बेहोशी, मतली और सिरदर्द आम हैं, पर कुछ जटिलताएं जानलेवा भी हो सकती हैं। ये मौसम किडनी की समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
गर्मी से बचाव के लिए करिए जरूरी उपाय
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क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली स्थित एक निजी अस्पताल में जनरल मेडिसिन के डॉक्टर आकाश कौशल सिंह बताते हैं, जब हमारा शरीर तापमान को ठीक तरीके से मैनेज कर पाने में असमर्थ हो जाता है तो इसके कारण कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। इसके हल्के लक्षणों में चकत्ते, हाथों या पैरों में सूजन, चक्कर आना, अत्यधिक पसीना या बिल्कुल पसीना न आने के साथ मांसपेशियों में ऐंठन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
इन समस्याओं से बचे रहने के लिए जरूरी है कि आप गर्मी से बचाव करते रहें, धूप में जाने से बचें और शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए निरंतर प्रयास करते रहें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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