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Health Alert: टॉयलेट में फोन चलाने की आदत 45% तक बढ़ा सकती है हेमोरॉयड्स रोग का खतरा, जानिए क्या है ये बीमारी

Sat, 06 Sep 2025 05:07 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • विशेषज्ञों ने सावधान किया है कि शौचालय में फोन का इस्तेमाल करने से हेमोरॉयड्स रोग होने का खतरा 45% से अधिक बढ़ सकता है। हेमोरॉयड्स को बवासीर या पाइल्स भी कहा जाता है। तो अगली बार टॉयलेट में फोन ले जाते समय सावधान हो जाइए।
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टॉयलेट में ले जाते हैं फोन? - फोटो : Amarujala.com
क्या आप भी टॉयलेट में अपना फोन लेकर जाते हैं? टॉयलेट में लंबे समय तक बैठे-बैठे रील्स देखते रहते हैं या स्क्रॉल करते रहते हैं? अगर हां, तो सावधान हो जाइए ये छोटी सी आदत आपको कई गंभीर बीमारियों का शिकार बना सकती है।

टॉयलेट में बैठे-बैठे सोशल मीडिया स्क्रॉल करते रहना, गेम खेलना, चैट या फिर ईमेल चेक करना ये सब अब आम आदत बन चुकी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये कंफर्ट जोन आपकी सेहत के लिए खतरे की घंटी हो सकता है? एक अध्ययन के मुताबिक, टॉयलेट में ले जाए गए फोन पर दरवाजे के हैंडल से 10 गुना ज्यादा बैक्टीरिया पाए जाते हैं। यानी आपका स्मार्टफोन एक मिनी जर्म हाउस में बदल सकता है।

इसी विषय को लेकर प्रकाशित एक अध्ययन की रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने सावधान किया है कि शौचालय में फोन का इस्तेमाल करने से हेमोरॉयड्स रोग होने का खतरा 45% तक बढ़ सकता है। हेमोरॉयड्स को बवासीर या पाइल्स भी कहा जाता है। तो अगली बार टॉयलेट में फोन ले जाते समय सावधान हो जाइए।
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बवासीर की हो सकती है दिक्कत (सांकेतिक) - फोटो : Freepik.com
टॉयलेट में लंबे समय तक बैठने की आदत से बवासीर का खतरा

एक नए अध्ययन में पाया गया है कि जो लोग शौचालय में बैठकर लंबे समय तक फोन का इस्तेमाल करते रहते हैं, उन्हें बवासीर होने का खतरा 46 प्रतिशत बढ़ जाता है। लंबे समय तक टॉयलेट में बैठने की आदत के कारण मलाशय के निचले हिस्से पर अत्यधिक दबाव पड़ता है जिसके कारण नसों में सूजन आ जाती है जो बवासीर का कारण बन सकती है। अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों की उम्र, लिंग, शारीरिक वजन, व्यायाम या फाइबर के सेवन का भी परिणामों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

यानी कि भले ही आपकी डाइट, वजन ठीक है फिर भी ये एक आदत बवासीर के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है।
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टॉयलेट में फोन का इस्तेमाल - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

बोस्टन स्थित बेथ इजराइल डीकोनेस मेडिकल सेंटर की वरिष्ठ लेखिका और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट त्रिशा सत्या पासरिचा कहती हैं, हम अभी भी उन समस्याओं को समझने की कोशिश रह हैं जो स्मार्टफोन और हमारी आधुनिक जीवनशैली के कारण हो रहे हैं।

इस शोध के लिए 125 वयस्कों की टॉयलेट से संबंधित की आदतों की जांच की गई। लगभग दो-तिहाई प्रतिभागियों ने बताया कि वे शौचालय में बैठकर अपने स्मार्टफोन पर स्क्रॉल करते रहते हैं। विशेषज्ञों ने पाया कि कि जो लोग  शौचालय का इस्तेमाल करते समय अपने फोन से चिपके रहते थे उनमें बवासीर होने की आशंका अधिक देखी गई। 

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डॉक्टरों ने किया सावधान - फोटो : Freepik
टॉयलेट में फोन्स का इस्तेमाल नुकसानदायक

डॉक्टर कहते हैं, मोबाइल फोन्स पर रील्स देखते रहने की आदत के चलते पहले की तुलना में अब औसतन 10 मिनट लोग सीट पर बिता रहे हैं। टॉयलेट सीट्स पर रोगजनक भी अधिक होते हैं, ऐसे में शरीर के संवेदनशील जननांग हिस्सों में संक्रमण का खतरा भी अधिक हो सकता है। 

इसके अलावा  गतिहीन जीवनशैली और खराब खान-पान की आदत आपके जोखिमों को दोगुना कर देती है। कम पानी पीने, जंक फूड का अधिक सेवन और टॉयलेट में लंबे समय तक बैठने जैसी आदत मिलकर इस तरह की बीमारियों के खतरे को कई गुना तक बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
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संक्रामक रोगों का खतरा - फोटो : Freepik.com
संक्रामक रोगों का भी हो सकता है खतरा

इसके अलावा टॉयलेट की सीट और वहां मौजूद चीजें जैसे बाल्टी-मग आदि पर लाखों वायरस-बैक्टीरिया हो सकते हैं। जब आप इनके इस्तेमाल के बाद फोन को छूते हैं तो हाथों के माध्मय से बैक्टीरिया आपको फोन पर चिपक जाते हैं। इसका एक जोखिम यह भी है कि आपका स्मार्टफोन शौच में मौजूद बैक्टीरिया से दूषित हो सकता है।

इस तरह के एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने फोन में ई.कोलाई और अन्य माइक्रोबियल की मौजूदगी का पता लगाया। ब्रिटेन के एक शोध अध्ययन में पाया गया कि औसत स्मार्टफोन स्क्रीन पर टॉयलेट सीट से भी ज्यादा बैक्टीरिया हो सकते हैं।


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स्रोत
EXPERT REACTION: Scrolling on the toilet linked to haemorrhoids


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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