बोन सिस्ट हड्डियों से जुड़ी एक ऐसी समस्या है जिसके बारे में बहुत कम लोगों को मालूम है। बता दें कि यह एक दुर्लभ बीमारी है, लेकिन जब किसी को ये बीमारी होती है तो उसकी परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। बोन सिस्ट होने पर उस जगह की हड्डी धीरे-धीरे गलने लगती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि कई बार लोग इसे कैंसर से जोड़कर देखने लगते हैं, मगर यह एक नॉन-कैंसरस बीमारी है।
बता दें कि मुख्य रूप से ये बीमारी बच्चों और किशोरों को होती है। बोन सिस्ट अक्सर तब सामने आती है जब मामूली चोट लगने पर अचानक हड्डी टूट जाती है। एक स्टडी के अनुसार ये सिस्ट आमतौर पर उन हड्डियों के सिरों पर विकसित होते हैं जहां 'ग्रोथ प्लेट्स' एक्टिव होती हैं, जैसे कि हाथ की ऊपरी हड्डी या जांघ की हड्डी। आमतौर पर ये सिस्ट दो प्रकार के होते हैं, पहला- एन्यूरिज्म बोन सिस्ट और दूसरा यूनीकार्म बोन सिस्ट।
कुछ स्टडी के अनुसार किशोरावस्था में तेजी से होने वाले शारीरिक विकास और हड्डियों के रीमॉडलिंग की प्रक्रिया को इसका एक मुख्य कारण माना जाता है। अच्छी बात यह है कि यह सिस्ट कैंसर नहीं होते और शरीर के अन्य हिस्सों में नहीं फैलते, लेकिन ये हड्डियों के घनत्व को कम कर उन्हें कमजोर बना देते हैं।
इस बीमारी का सबसे शुरुआती लक्षण है कि प्रभावित जगह पर बिना कारण दर्द होना, और एक्स-रे होने पर उस जगह ही हड्डी का घनत्व कम दिखना है। अच्छी बात यह है कि समय पर पहचान होने पर इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
किशोरावस्था में ही क्यों बढ़ता है इसका खतरा?
- एक स्टडी के मुताबिक किशोरावस्था के दौरान हड्डियां सबसे तेजी से बढ़ती हैं, और इस दौरान हड्डियों के भीतर तरल पदार्थ का दबाव या रक्त वाहिकाओं में बदलाव सिस्ट का रूप ले सकता है।
- एम्स दिल्ली के ऑर्थोपेडिक डिपार्टमेंट के प्रोफेसर शाह आलम के मुताबिक यह सामान्यतौर पर 5 से 15 वर्ष के उम्र के बच्चों में देखने को मिलता है, क्योंकि इस दौरान 'बोन रिसेप्शन' और निर्माण की प्रक्रिया तेजी से होती है।
क्या होते हैं बोन सिस्ट के मुख्य लक्षण?
- बोन सिस्ट के अपने कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते और इसमें प्रभावित जगह पर कई बार दर्द होता है पर कई मामलों दर्द नहीं भी हो सकता है, जब तक कि हड्डी कमजोर होकर टूट न जाए।
- अक्सर खेल-कूद के दौरान होने वाली सूजन या मामूली मोच को एक्स-रे कराने पर इस बीमारी का पता चलता है।
- अगर किसी बच्चे को बिना किसी भारी चोट के बार-बार एक ही स्थान पर दर्द या फ्रैक्चर हो रहा है, तो यह बोन सिस्ट का शुरुआती संकेत हो सकता है।
कैसे हो सकता है इसका उपचार?
- छोटे सिस्ट को डॉक्टर अक्सर केवल निगरानी में रखते हैं, क्योंकि कई मामलों में उम्र बढ़ने के साथ ये अपने आप भर जाते हैं।
- अगर सिस्ट बड़ा है और फ्रैक्चर का डर है, तो 'क्यूरेटेज' प्रक्रिया के जरिए तरल निकालकर वहां 'बोन ग्राफ्टिंग' की जाती है।
- कुछ मामलों में स्टेरॉयड इंजेक्शन के जरिए भी इन सिस्ट को बिना सर्जरी के ठीक किया जा सकता है।
- अगर सिस्ट अधिक हुआ तो डॉक्टर सर्जरी का सुझाव भी दे सकते हैं।
समय पर जांच है जरूरी
बोन सिस्ट सुनकर घर वालों का डरना स्वाभाविक है, लेकिन सही जानकारी और समय पर इलाज से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। बता दें कि इस बीमारी की पुष्टी विशेषज्ञ शरीर के प्रभावित हिस्से के टिश्यू का बायोप्सी करने के बाद ही करते हैं। जब बायोप्सी के रिपोर्ट में बोन सिस्ट की पुष्टि होती है उसके बाद इसका इलाज कराना चाहिए। अगर बच्चा हड्डियों में किसी भी प्रकार की असामान्यता या कमजोरी महसूस करता है, तो तुरंत आर्थोपेडिक विशेषज्ञ से संपर्क करें।
स्रोत और संदर्भ
Unicameral Bone Cyst
Aneurysmal Bone Cyst (ABC)
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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